नरसिंहपुर: इलाज और एम्बुलेंस में देरी से युवक की मौत? करेली अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में एक युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करेली के सरकारी अस्पताल में अंशु पटेल नाम के युवक ने इलाज में कथित देरी के…
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में एक युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करेली के सरकारी अस्पताल में अंशु पटेल नाम के युवक ने इलाज में कथित देरी के चलते दम तोड़ दिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के दोस्तों ने आरोप लगाया है कि अगर अस्पताल में सही समय पर इलाज और एम्बुलेंस मिल जाती, तो अंशु की जान बचाई जा सकती थी।
घटना तब सामने आई जब अंशु पटेल ने ज़हरीला पदार्थ खाने के बाद खुद अपने दोस्त रोहित को फोन कर इसकी सूचना दी और अपनी लोकेशन बताई। रोहित अपने अन्य साथियों के साथ तुरंत मौके पर पहुँचा। रास्ता खराब होने की वजह से उन्हें करीब 200 मीटर पैदल दौड़कर अंशु तक पहुँचना पड़ा, जिसके बाद वे उसे करेली के सरकारी अस्पताल ले गए।
दोस्तों ने लगाए लापरवाही के आरोप
अस्पताल में जो हुआ, उसे लेकर मृतक के दोस्त शशांक पटेल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉक्टर थे, न स्ट्रेचर और न ही ऑक्सीजन की उचित व्यवस्था थी। उनका दावा है कि ऑक्सीजन सिलेंडर होने के बावजूद, मरीज़ तक उसे पहुँचाने के लिए ज़रूरी उपकरण समय पर नहीं मिले और स्टाफ उन्हें ढूंढता रहा, जिससे कीमती समय बर्बाद हुआ।
दोस्तों के मुताबिक, सबसे बड़ी लापरवाही एम्बुलेंस को लेकर हुई। उन्होंने बताया कि गंभीर हालत में अंशु को जिला अस्पताल रेफर करने के लिए करीब एक घंटे तक एम्बुलेंस का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान सीएमओ समेत कई अधिकारियों को फोन किए गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। रोहित ने बताया कि अस्पताल के बाहर खड़ी एम्बुलेंस के नंबरों पर भी फोन किया, पर किसी ने उठाया नहीं। आखिरकार, नरसिंहपुर से एक निजी एम्बुलेंस का इंतजाम किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अस्पताल ने क्या कहा?
आरोपों पर सफाई देते हुए ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने कहा कि अस्पताल की तरफ से हर संभव कोशिश की गई थी। उन्होंने बताया कि मरीज़ को प्राथमिक उपचार देने के बाद जिला अस्पताल रेफर करने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई थी। उनके अनुसार, डॉ. अनीता पटेल ने युवक को बचाने के लिए करीब 25 मिनट तक लगातार सीपीआर भी दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
एम्बुलेंस में देरी की बात को स्वीकार करते हुए डॉक्टर ने कहा कि सेवा के लिए कई बार फोन किया गया था, लेकिन उस समय कोई सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं थी, क्योंकि वे अक्सर हाईवे या अन्य क्षेत्रों में व्यस्त रहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल की ओर से किए गए सभी कॉल और प्रक्रिया का रिकॉर्ड मौजूद है।
इनपुट: IANS



