मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
संस्कृति

नमो भारत स्टेशन अब सिर्फ़ सफ़र के लिए नहीं, कला-संस्कृति के केंद्र भी बनेंगे

दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर यात्रा करने वालों को जल्द ही एक नया अनुभव मिलने वाला है। अब ये स्टेशन सिर्फ़ आने-जाने के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें कला, संस्कृति और सार्वजनिक जुड़ाव के जीवं…

नमो भारत स्टेशन अब सिर्फ़ सफ़र के लिए नहीं, कला-संस्कृति के केंद्र भी बनेंगे
(फोटो: IANS)

दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर यात्रा करने वालों को जल्द ही एक नया अनुभव मिलने वाला है। अब ये स्टेशन सिर्फ़ आने-जाने के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें कला, संस्कृति और सार्वजनिक जुड़ाव के जीवंत मंच के रूप में भी विकसित किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस पहल के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

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इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को उनकी रोज़मर्रा की यात्रा के दौरान भारत की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर स्टेशनों पर विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं तलाशेंगे।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

समझौते के मुताबिक, नमो भारत स्टेशन परिसरों में विशेष कला प्रदर्शनियों, साहित्यिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, व्याख्यानों और विरासत से जुड़ी प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा। आईजीएनसीए इन कार्यक्रमों के लिए अपनी विशेषज्ञता के आधार पर विषयवस्तु तैयार करने में सहयोग करेगा, जबकि एनसीआरटीसी इन आयोजनों के लिए अपने स्टेशनों पर जगह उपलब्ध कराएगा। इससे यात्रियों के अलावा छात्रों, कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी स्टेशनों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

दिल्ली-मेरठ: ऐतिहासिक शहरों का संगम

यह कॉरिडोर दो ऐसे शहरों को जोड़ता है जिनका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। दिल्ली सदियों से देश की राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रही है, तो वहीं मेरठ का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी इसकी अहम भूमिका थी। यह पहल आधुनिक परिवहन को देश की विरासत से जोड़ने का एक माध्यम बनेगी।

बढ़ते यात्री और नई सोच

नमो भारत कॉरिडोर पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में यहाँ प्रतिदिन लगभग 1.1 लाख लोग सफ़र कर रहे हैं और अब तक कुल 4.5 करोड़ से ज़्यादा यात्राएं पूरी हो चुकी हैं। यात्रियों के इसी बढ़ते आधार को देखते हुए स्टेशनों को सामाजिक जुड़ाव के केंद्र बनाने की यह कोशिश की जा रही है। एनसीआरटीसी का मानना है कि इस पहल से स्टेशन सिर्फ़ परिवहन के स्थल न रहकर भारत की कहानियों, परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों से जुड़ने का मंच बनेंगे।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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