उत्तराखंड: नैनीताल के गाँवों में ड्रोन से सुलझेगी ज़मीन की उलझन, दशकों पुरानी समस्या का होगा समाधान
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भूमि से जुड़े दशकों पुराने विवादों और रिकॉर्ड की खामियों को दूर करने के लिए अब ड्रोन और डीजीपीएस जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। रामनगर तहसील के चार प्रमुख…
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भूमि से जुड़े दशकों पुराने विवादों और रिकॉर्ड की खामियों को दूर करने के लिए अब ड्रोन और डीजीपीएस जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। रामनगर तहसील के चार प्रमुख क्षेत्रों— पंपापुरी, दुर्गापुरी, कौशल्यापुरी और भरतपुरी—में भूमि की गणना और सीमांकन की प्रक्रिया इसी हाई-टेक सर्वे के तहत शुरू की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राजस्व अभिलेखों को पूरी तरह पारदर्शी, सटीक और अपडेट करना है।
यह विशेष सर्वेक्षण राजस्व परिषद, उत्तराखंड की पहल पर नैनीताल और हरिद्वार के कुछ चुनिंदा गाँवों में कराया जा रहा है। इसकी ज़िम्मेदारी भारतीय सर्वेक्षण विभाग (सर्वे ऑफ इंडिया), देहरादून की टीम को सौंपी गई है, जो अपने विशेष उपकरणों और ड्रोन तकनीक से ज़मीन की सटीक जानकारी जुटा रही है। रामनगर स्थित पीएनजीपीजी महाविद्यालय परिसर से इन इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया गया।
क्यों पड़ी इस आधुनिक सर्वे की ज़रूरत?
रामनगर के उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि भरतपुरी, पंपापुरी और कौशल्यापुरी जैसे क्षेत्रों में भूमि गणना की माँग स्थानीय लोग लंबे समय से कर रहे थे। ये इलाके नॉन-जेडी (Non-Zamindari Abolition) भूमि की श्रेणी में आते हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रक्रिया शुरू तो हुई, लेकिन 1948 के बाद के कुछ पुराने रिकॉर्ड और तकनीकी चुनौतियों के चलते काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
इसके बाद, मामला जिलाधिकारी के माध्यम से राजस्व परिषद तक पहुँचाया गया, जिसने सर्वे ऑफ इंडिया को यह काम सौंपा। ग्रामीण क्षेत्रों में घनी आबादी और जटिल भौगोलिक बनावट के कारण अक्सर भूमि बंदोबस्त और चकबंदी से जुड़े मामले उलझ जाते हैं। यह सर्वे इन्हीं समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए किया जा रहा है।
सर्वे से क्या उम्मीदें हैं?
आधुनिक तकनीक से सटीक जानकारी: ड्रोन और डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) के इस्तेमाल से भूमि की वास्तविक स्थिति का सटीक पता लगाया जा सकेगा, जिससे मालिकाना हक़ और सीमाओं से जुड़े विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुँचकर ज़मीन से जुड़े सभी ज़रूरी आँकड़े इकट्ठा कर रही है। इस सर्वे के पूरा होने के बाद न केवल राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त होंगे, बल्कि स्थानीय लोगों को उनकी ज़मीन से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्याओं से भी निजात मिलने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
इनपुट: IANS



