मध्य प्रदेश: मोहन यादव सरकार 20 हजार से ज़्यादा निजी स्कूलों को देगी ₹502 करोड़ की RTE फीस
मध्य प्रदेश में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत पढ़ रहे 8 लाख से ज़्यादा बच्चों की फ़ीस प्रतिपूर्ति के लिए राज्य सरकार 502 करोड़ रुपये की राशि जारी करेगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…
मध्य प्रदेश में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत पढ़ रहे 8 लाख से ज़्यादा बच्चों की फ़ीस प्रतिपूर्ति के लिए राज्य सरकार 502 करोड़ रुपये की राशि जारी करेगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सिंगल क्लिक के माध्यम से यह राशि सीधे स्कूलों के खातों में ट्रांसफर करेंगे।
इस कदम से प्रदेश के 20,456 निजी स्कूलों को शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए फीस प्रतिपूर्ति मिलेगी, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। सरकार के अनुसार, RTE के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
नरसिंहपुर में नए सांदीपनि स्कूल का लोकार्पण
इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव नरसिंहपुर में बने एक अत्याधुनिक शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नए भवन का भी लोकार्पण करेंगे। इस सर्वसुविधायुक्त विद्यालय भवन का निर्माण 45 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया गया है। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में विद्यार्थी व अभिभावक भी मौजूद रहेंगे।
क्या है सांदीपनि विद्यालय योजना?
प्रदेश सरकार बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सांदीपनि विद्यालय बना रही है। नरसिंहपुर का यह स्कूल योजना के पहले चरण का हिस्सा है। यहां केजी-1 से 12वीं तक के छात्रों के लिए डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं हैं। साथ ही खेल मैदान और परिवहन की सुविधा भी दी गई है।
उल्लेखनीय है कि इस योजना के सकारात्मक परिणाम भी दिख रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इसी विद्यालय की छात्रा कुमारी माही साहू ने कक्षा 12वीं की मेरिट लिस्ट में जगह बनाकर स्कूल का नाम रोशन किया था।
RTE प्रतिपूर्ति का अब तक का सफ़र
मध्य प्रदेश में RTE अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को निःशुल्क प्रवेश दिया जाता है। इन बच्चों की फीस सरकार सीधे संबंधित स्कूलों को देती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2011 से अब तक इस योजना के अंतर्गत 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों के लिए 3,600 करोड़ रुपये की फीस प्रतिपूर्ति की जा चुकी है।
इनपुट: IANS



