मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- लोकतांत्रिक आवाज़ दबाई जा रही
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने के…
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने के संदर्भ में आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने वालों की आवाज को दबाने का प्रयास हो रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जरांगे ने कहा कि छात्रों, किसानों और मराठा समुदाय के मुद्दे उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।
जरांगे पाटील ने कहा, "अब देश में ऐसी स्थिति बन गई है कि क्या कोई लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन भी नहीं कर सकता और छात्रों के सवाल भी नहीं उठा सकता?" उन्होंने माना कि उन्हें दिपके के मामले की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उनका अनुमान है कि यह छात्रों से जुड़ा कोई मुद्दा हो सकता है।
आरक्षण और आंदोलन पर सरकार का रवैया
मराठा आरक्षण की मांग को जायज ठहराते हुए मनोज जरांगे पाटील ने सरकार पर इसे टालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार मराठा समाज को आरक्षण देने के बजाय उसमें फूट डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने अपने आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा, "मैं ईमानदारी से आंदोलन कर रहा हूं, लेकिन मुझे लगातार परेशान किया जा रहा है। अधिकारियों के जरिए दबाव बनाया जाता है और आंदोलन को लेकर अलग-अलग लोगों से मीडिया में बयान दिलवाए जाते हैं।" इसे उन्होंने सरकार की ओर से किया जा रहा अन्याय बताया।
जंतर-मंतर पर सवाल और भविष्य की चेतावनी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन को लेकर पुलिस की तैनाती और यातायात पाबंदियों पर भी जरांगे पाटील ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोगों की मांगें सुनने के बजाय उन्हें गलत साबित करने की कोशिश की जा रही है। पाटील ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता सरकार की कार्यशैली को समझ रही है और सत्ता का दुरुपयोग कर आम लोगों से अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि जनता जागरूक हो चुकी है और समय आने पर सरकार को बड़ा सबक सिखाएगी।
इनपुट: IANS



