MPSC ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक: प्रेम संबंध टूटने पर हुआ खुलासा, अब तक 7 गिरफ्तार
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले में एक नाटकीय मोड़ सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, एक उम्मीदवार और उसके प्रेमी के बीच…
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले में एक नाटकीय मोड़ सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, एक उम्मीदवार और उसके प्रेमी के बीच संबंध टूटने के बाद इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश हुआ। पुणे क्राइम ब्रांच ने इस मामले में अब एक और वांछित आरोपी ऋतुजा पाटिल को नंदुरबार से हिरासत में ले लिया है, जिससे गिरफ्तारियों की कुल संख्या सात हो गई है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब गौरव पाटिल नाम के शख्स ने ब्रेकअप के बाद अपनी प्रेमिका ऋतुजा पाटिल और पेपर लीक से जुड़ी जानकारी MPSC को देने का फैसला किया। गौरव ने एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ऋषिकेश गांगुर्दे से संपर्क साधा, जो FDA से जुड़ा कंटेंट बनाते हैं, और उन्हें बताया कि उसके पास लीक हुए पेपर की कॉपी है। इसी शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई।
जांच में पैसों का लेन-देन और कोचिंग क्लास कनेक्शन
क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल टीम की जांच में सामने आया है कि यह सौदा करीब 12 लाख रुपये में तय हुआ था। पुलिस को एक कोचिंग क्लास चलाने वाले प्रवीण पाटिल और MPSC के गिरफ्तार अधिकारियों के बीच करीब 5 लाख रुपये के लेन-देन के सबूत मिले हैं। जानकारी के मुताबिक, ऋतुजा ने अपने पिता अमृत पाटिल से पेपर हासिल करने के लिए कहा था, जिसके बाद अमृत ने बिचौलिए के तौर पर प्रवीण पाटिल से संपर्क किया। पुलिस अब इस पूरे वित्तीय लेन-देन की कड़ियाँ जोड़ रही है।
नंदुरबार से जुड़े हैं घोटाले के तार
अब तक की जांच में यह भी पता चला है कि इस नेटवर्क के कई प्रमुख लोग नंदुरबार से जुड़े हैं, जिनमें प्रवीण पाटिल, ऋतुजा के पिता अमृत पाटिल और MPSC के कुछ गिरफ्तार अधिकारी शामिल हैं। हालांकि, पुलिस का मानना है कि प्रवीण की कोचिंग क्लास का ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा से सीधा कोई संबंध नहीं है, जिससे शक गहरा गया है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। यह पेपर परीक्षा से दो दिन पहले ही लीक हो गया था।
इससे पहले 26 अगस्त को मुंबई क्राइम ब्रांच ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें अदालत ने 2 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा है। इस मामले में MPSC से जुड़े तीन अधिकारियों—विश्वेश्वर नकटे (सहायक कक्ष अधिकारी), गोपाल मराठे (अवर सचिव) और अभिजीत लेंडवे (अवर सचिव)—के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
इनपुट: IANS



