MMDR संशोधन बिल: बीजद का आरोप - ओडिशा को हर साल होगा 12 हजार करोड़ का नुकसान
बीजू जनता दल (बीजद) ने संसद में पारित हुए खान और खनिज (विकास और विनियमन) यानी एमएमडीआर संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भृगु बक्सीपात्रा ने आरोप लगाया है…
बीजू जनता दल (बीजद) ने संसद में पारित हुए खान और खनिज (विकास और विनियमन) यानी एमएमडीआर संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भृगु बक्सीपात्रा ने आरोप लगाया है कि इस संशोधन से न केवल ओडिशा को भारी वित्तीय हानि होगी, बल्कि राज्य का अपने ही खनिज संसाधनों पर अधिकार भी कमजोर पड़ जाएगा। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक के कारण ओडिशा को भविष्य में हर साल लगभग 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।
बक्सीपात्रा ने कहा कि यह विधेयक संसद में बिना किसी गंभीर चर्चा के एकतरफा तरीके से पारित कर दिया गया, जिसका बीजू जनता दल ने राज्यसभा में विरोध किया था। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले ही बीजद अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी इस विधेयक से राज्य को होने वाले नुकसान को सार्वजनिक तौर पर विस्तार से बताया था।
राजस्व और अधिकारों पर असर
बीजद नेता के अनुसार, खनन क्षेत्र ओडिशा के बजट और रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत है और इस संशोधन से राज्य की आय बुरी तरह प्रभावित होगी। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आधार पर ओडिशा को 2005 से 2024 तक माइंस सेस के रूप में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन नए संशोधन के कारण यह राशि अब राज्य को नहीं मिल पाएगी। बक्सीपात्रा ने कहा, "यह केवल वित्तीय नुकसान नहीं है, बल्कि राज्य के खनिज संसाधनों पर अधिकार का भी सवाल है।" उनके मुताबिक, इस संशोधन के जरिए राज्य की जमीन, खदानों और खनिजों पर अधिकार केंद्र सरकार के हाथों में चला जाएगा।
प्रभावित होंगे कमजोर वर्ग
भृगु बक्सीपात्रा ने चिंता जताते हुए कहा कि इस फैसले का सबसे बुरा असर आदिवासी, दलित, किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ेगा। उन्होंने तर्क दिया कि खनन से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं समुदायों के विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किया जाता था। उन्होंने कहा, "खनन परियोजनाओं से विस्थापन ओडिशा के लोगों का होता है, जमीन, पानी और बिजली राज्य की है, इसलिए खनिज संपदा पर राज्य का अधिकार भी बना रहना चाहिए।"
भाजपा के आरोपों पर पलटवार
बीजद नेता ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें 2015 के एमएमडीआर कानून के बाद ओडिशा की खनन आय बढ़ने का जिक्र था। बक्सीपात्रा ने स्पष्ट किया कि बीजद ने 2015 के संशोधन का स्वागत किया था क्योंकि उससे सभी खनन राज्यों को लाभ हुआ था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में राज्य के अधिकार और राजस्व को खत्म कर दिया जाए। उन्होंने कहा, "दिल्ली ओडिशा की मालिक नहीं हो सकती।"
ओडिशा की वित्तीय स्थिति पर भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, आरबीआई और नीति आयोग भी ओडिशा को वित्तीय अनुशासन वाला राज्य मान चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि नवीन पटनायक सरकार ने 24 वर्षों में 78 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया, जबकि मौजूदा भाजपा सरकार ने कथित तौर पर सिर्फ दो वर्षों में ही 1 लाख 38 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया है।
इनपुट: IANS



