भारत-नेपाल व्यापार में नया अध्याय: कोलकाता से पहली मालगाड़ी सीधे बिराटनगर पहुँची
भारत और नेपाल के बीच व्यापार और ट्रांजिट व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। पहली बार, कोलकाता बंदरगाह से चली एक मालगाड़ी सीधे नेपाल के बिराटनगर स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) तक पहुँची है…
भारत और नेपाल के बीच व्यापार और ट्रांजिट व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। पहली बार, कोलकाता बंदरगाह से चली एक मालगाड़ी सीधे नेपाल के बिराटनगर स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) तक पहुँची है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मालगाड़ी कैनोला अनाज से भरे 40 कंटेनर लेकर आई, जिसने जोगबनी स्थित भारतीय कस्टम यार्ड के रास्ते यह दूरी तय की।
नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। दूतावास के पोस्ट के मुताबिक, कैनोला अनाज की यह पहली खेप 20 जुलाई 2026 को बिराटनगर कस्टम यार्ड पहुँची थी। यह सफलता नवंबर 2025 में हस्ताक्षरित नेपाल-भारत ट्रांजिट संधि के प्रोटोकॉल में हुए संशोधन का सीधा परिणाम है। इस संशोधन ने नेपाल को बिराटनगर ICP के माध्यम से बल्क और कंटेनर, दोनों तरह की रेल माल ढुलाई सेवाओं के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।
लॉजिस्टिक्स लागत में कमी की उम्मीद
इस नई क्रॉस-बॉर्डर कार्गो ट्रेन सेवा से व्यापार की राह आसान होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इससे लॉजिस्टिक्स पर आने वाला खर्च कम होगा और भारत-नेपाल के बीच व्यापार को और बढ़ावा मिलेगा। यह पहली बार है जब भारतीय सहयोग से बने बिराटनगर ICP पर कोई मालगाड़ी सीधे पहुँची है।
बिराटनगर कस्टम्स कार्यालय के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी, उमेश श्रेष्ठ ने IANS को बताया कि सोमवार को ICP पर पहुँची इस मालगाड़ी में 40 कंटेनर थे, जिनमें स्वस्तिक ऑयल इंडस्ट्रीज के लिए कच्चा माल (कैनोला अनाज) लाया गया है।
आधुनिक तकनीक से लैस परिवहन
कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CONCOR) द्वारा संचालित इस मालगाड़ी के सभी कंटेनरों में इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ECTS) लगाया गया था। इस तकनीक की मदद से पूरे रास्ते माल की आवाजाही पर नज़र रखी जा सकी। नेपाल के कोलकाता स्थित महावाणिज्य दूतावास ने पहले एक प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी थी कि यह मालगाड़ी 17 जुलाई को कोलकाता बंदरगाह से 40 उच्च क्षमता वाले कंटेनरों के साथ रवाना हुई थी।
इनपुट: IANS



