झारखंड: लाखों बुजुर्गों और दिव्यांगों की पेंशन कई महीनों से रुकी? बाबूलाल मरांडी ने सरकार से की तत्काल भुगतान की मांग
झारखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर निर्भर लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने दावा किया है कि इन जरूरतमंद लोगों को…
झारखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर निर्भर लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने दावा किया है कि इन जरूरतमंद लोगों को पिछले पांच से छह महीनों से उनकी पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली खबर के मुताबिक, मरांडी ने इस मामले में हेमंत सोरेन सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
बाबूलाल मरांडी ने सरकार को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाते हुए कहा कि बेसहारा और जरूरतमंदों को समय पर सामाजिक सुरक्षा का लाभ देना सरकार का दायित्व है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कई लोगों के लिए यह पेंशन ही उनके जीवनयापन का एकमात्र सहारा है।
पेंशन नहीं, बल्कि जीवन का आधार
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, पेंशन की यह राशि भले ही कुछ सौ या हजार रुपए की हो, लेकिन यह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "किसी के लिए यह दवा और इलाज का सहारा है तो किसी के लिए घर का चूल्हा जलाने का साधन।" मरांडी ने बताया कि इसी पैसे से कई लोग अपनी दवाइयां खरीदते हैं और घर का राशन चलाते हैं।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि भुगतान में लंबी देरी के कारण कई लोग भोजन और दवा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी परेशान हो रहे हैं। मरांडी ने कहा कि यह आर्थिक मदद इन लोगों को सम्मान के साथ जीवन जीने का आधार भी प्रदान करती है, खासकर जब उनकी आय का कोई दूसरा स्रोत न हो।
सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन की लंबित बकाया राशि को अविलंब जारी करे ताकि जरूरतमंदों को राहत मिल सके। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इनपुट: IANS



