14 साल तक के बच्चों की शिक्षा: सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में शिक्षा सचिव को नोटिस भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। यह मामला 14 साल से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा देने वाले संस्थानों के नियमन से जुड़े अदालत के…
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। यह मामला 14 साल से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा देने वाले संस्थानों के नियमन से जुड़े अदालत के एक पुराने निर्देश का पालन न करने के आरोपों से संबंधित है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने शिक्षा मंत्रालय के सचिव से इस पर जवाब मांगा है।
मंगलवार को हुई सुनवाई में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने आईएएस अधिकारी टी.के. अनिल कुमार को नोटिस जारी किया। यह कार्रवाई वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर अवमानना याचिका पर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में विफल रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद उपाध्याय द्वारा दायर एक रिट याचिका से शुरू हुआ था। याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र और राज्य सरकारें 14 साल तक के बच्चों को धर्मनिरपेक्ष या धार्मिक शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों का पंजीकरण, मान्यता और निगरानी सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश समेत देश के कई सीमावर्ती जिलों में बिना रजिस्ट्रेशन और मान्यता के ऐसे संस्थान तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों पर बुरा असर पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को इस रिट याचिका का निपटारा करते हुए उपाध्याय को मंत्रालय के समक्ष अपनी बात रखने को कहा था। अदालत ने मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह 10 फरवरी 2026 को दी गई अर्जी पर एक निश्चित समय के भीतर फैसला ले।
अवमानना याचिका की वजह
अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अपनी अवमानना याचिका में आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद, संबंधित अधिकारी ने उनकी अर्जी पर कोई निर्णय नहीं लिया। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21ए का हवाला देते हुए कहा गया है कि संस्थानों के उचित नियमन के बिना बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 30(1) के दायरे पर भी स्पष्टीकरण मांगा है। इससे पहले भी उपाध्याय इसी मुद्दे पर जनहित याचिकाएं दायर कर चुके हैं, जिन्हें अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि एक ही मामले पर बार-बार याचिका नहीं डाली जा सकती। अब इस अवमानना मामले पर अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।
इनपुट: IANS



