ताजमहल में शिव चालीसा, महल या मंदिर?

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ताजमहल में शिव चालीसा, महल या मंदिर?
ताजमहल में शिव चालीसा, महल या मंदिर?

ताजमहल पर मोहब्बत कम सियासत ज्यादा हो रही है। जी हाँ, बीते कुछ दिनों से ताजमहल चर्चा का विषय बन चुका है। ताजमहल को लेकर सियासी सरगर्मियां तो अपनी जगह है, लेकिन सियासत की वजह से मोहब्बत की ये निशानी अब नफरतों का अखाड़ा बनती नजर आ रही है। आइये खबर पर एक नजर डालते है…

हिंदू वाहिनी के कार्यकर्ताओं द्वारा सोमवार को ताजमहल के बाहर शिव चालीसा पढ़ने से विवाद का महौल बन गया है। ताजमहल को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब यूपी के पर्यटन बुक से ताजमहल का नाम हटाने की खबर आई, इसके बाद तो ताजमहल मोहब्बत की निशानी न रहकर सियासत का अखाड़ा बन गया है। आपको बता दें कि ताजमहल को लेकर सियासी गलियारों में लगातार घमासान मचा हुआ है।

ताजमहल में शिव चालीसा करने पर खड़े हुए विवाद का जवाब देने आए बीजेपी नेता विनय कटियार ने खुद ही एक बड़ा विवादित बयान दे डाला। आपको बता दें कि विनय कटियार का कहना है कि ताजमहल में पूजा करना गलत नहीं,  कोई अंदर नहीं गया बाहर ही पूजा की है, ऐसे में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए फिर चाहे कोई वहाँ शिव चालीसा पढ़े या फिर हनुमान चालीसा।

 

ताजमहल नहीं, तेजो मंदिर है…

बीजेपी नेता विनय कटियार का कहना है कि ताजमहल पुराने राजाओं का मंदिर है,  जिसे शाहजहां ने कब्र बना दिया। साथ ही कटियार ने ये भी कहा कि मुमताज तो औरंगाबाद में दफनाई गई थी, बाद में शाहजहां ने उसे ताजमहल में दफनाया।

 

बीजेपी नेता ने आगे कहा कि इमारत तो अच्छी है, पर वो ताजमहल नहीं है, तेजो मंदिर है। इस बात के कई तर्क पेश करते हुए कटियार ने कहा कि ताजमहल में मंदिर होने के कई प्रणाम हैं वहां पानी गिर रहा है जबकि पानी तो शिव मंदिर में ही गिरता है। ये कहते हुए कटियार ने ये भी कहा कि ताजमहल मस्जिद नहीं है, वो मंदिर है।

 

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