मध्य प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, 1.15 लाख पद खाली: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का दावा
मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की स्थिति को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में सवा लाख से ज़्यादा शिक्षकों के पद ख
मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की स्थिति को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में सवा लाख से ज़्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिसका असर लाखों बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया के माध्यम से ये आंकड़े जारी किए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में शिक्षकों के कुल 2.89 लाख स्वीकृत पदों में से 1,15,678 पद रिक्त हैं। सिंघार ने इस स्थिति को 'मध्य प्रदेश के भविष्य के साथ सबसे बड़ा अन्याय' करार दिया है।
स्कूलों की बदहाली और छात्रों का पलायन
सिंघार ने सिर्फ़ शिक्षकों की कमी ही नहीं, बल्कि स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, राज्य में 1,895 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। इसके अलावा, करीब 5,000 स्कूल जर्जर इमारतों में चल रहे हैं, 3,400 स्कूलों में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा नहीं है और 59,000 स्कूलों में कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हीं वजहों से पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों से 22.03 लाख छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी या निजी स्कूलों का रुख कर लिया।
सरकार पर निशाना और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा, "बच्चों का भविष्य विज्ञापनों से नहीं, शिक्षकों की भर्ती, बेहतर स्कूलों और जवाबदेह सरकार से बनता है।" उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा के हालात इतने खराब हो चुके हैं कि उच्च न्यायालय को भी इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है।
गौरतलब है कि शिक्षकों की कमी और स्कूलों में अन्य सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
इनपुट: IANS



