मध्य प्रदेश में 21 साल बाद लौटीं सरकारी बसें, 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के तहत 351 बसों को दिखाई हरी झंडी
मध्य प्रदेश की सड़कों पर दो दशक से भी लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर सरकारी बसें दौड़ती नजर आएंगी। भोपाल में आयोजित एक राज्य-स्तरीय कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और…
मध्य प्रदेश की सड़कों पर दो दशक से भी लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर सरकारी बसें दौड़ती नजर आएंगी। भोपाल में आयोजित एक राज्य-स्तरीय कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रिमोट के जरिए 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना' का शुभारंभ किया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस योजना के पहले चरण में 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
यह योजना प्रदेशवासियों को एक सुगम, सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सुविधा मुहैया कराने के लक्ष्य से शुरू की गई है। सरकार का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बस कनेक्टिविटी को मजबूत करना है, ताकि राज्य की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक परिवहन सेवा का विस्तार हो सके।
क्या है सरकार का लक्ष्य और योजना का मॉडल?
राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आगे बढ़ाने का फैसला किया है। योजना के तहत वर्ष 2031 तक प्रदेश में कुल 15,000 बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले साल 1,500 बसों का संचालन शुरू किया जाएगा और इसके बाद हर साल लगभग 2,500 से 3,000 नई बसें बेड़े में जोड़ी जाएंगी। भोपाल के भेल दशहरा मैदान में 25 सितंबर को इस योजना की औपचारिक शुरुआत हुई।
आधुनिक तकनीक और सुरक्षा पर जोर
यात्रियों की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इन बसों को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के माध्यम से बसों के संचालन, उनकी लोकेशन और समय की पाबंदी पर रियल-टाइम नज़र रखी जाएगी। इसके लिए कमांड-कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किए गए हैं। साथ ही, महिलाओं और बच्चों सहित सभी यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हर बस में सीसीटीवी कैमरे और आपातकालीन स्थिति के लिए पैनिक बटन की सुविधा भी दी गई है।
इनपुट: IANS



