पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक लोकसभा में पास, चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर साधा निशाना
लोकसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह…
लोकसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
केंद्रीय मंत्री ने इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष, विशेषकर लोकसभा में विपक्ष के नेता के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष सार्थक सुझाव देने के बजाय इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है।
विपक्ष के आचरण पर उठाए सवाल
जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के व्यवहार को "बेहद निराशाजनक" बताया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष के नेता ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न केवल असंसदीय थी, बल्कि इतनी अनुचित थी कि मैं उसे दोहराना भी नहीं चाहूंगा।"
उन्होंने आगे कहा, "यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है, तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता।"
युवाओं पर टिप्पणी और 21 जुलाई की घटना
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष के नेता द्वारा देश के युवाओं को "मूर्ख" कहे जाने को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा, "इस देश के युवाओं को, जो देश का भविष्य हैं, 'मूर्ख' कहना इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है।"
सिंह ने 21 जुलाई की एक घटना का उल्लेख करते हुए विपक्ष के नेता पर तंज कसा और कहा कि वे प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर बैठ गए थे, जो शायद उनकी अधूरी इच्छाओं का प्रतीक था।
गोली चलने के आरोपों का खंडन
सदन में उठाए गए एक अन्य मुद्दे पर जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि जिस घटना का जिक्र किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि सिर्फ आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ था। उन्होंने कहा, "बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चली। जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता। इस तरह का आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।"
इनपुट: IANS



