रविवार, 28 जून 2026 · नई दिल्ली
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उत्तर प्रदेश: तो क्या वापस होगा जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव, जानिए कहा फस रहा है पेंच

जेवर एयरपोर्ट के भविष्य को लेकर अब चिंताए बढ़ने लगी है . सवाल यह उठ रहा है की क्या जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव क्या वापस होगा.

उत्तर प्रदेश: तो क्या वापस होगा जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव, जानिए कहा फस रहा है पेंच
जेवर एयरपोर्ट के भविष्य को लेकर अब चिंताए बढ़ने लगी है . सवाल यह उठ रहा है की क्या जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव क्या वापस होगा. दरअसल किसानो के रवैये के चलते इस प्रस्ताव पर संकट के बादल मंडरा रहे है. किसान बनाये सहमति नहीं तो प्रस्ताव होगा वापस: CM योगी प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ ने स्पष्ट कर दिया है की अगर किसान जमीन अधिग्रहण को लेकर सहमत नहीं होंगे तो प्रस्ताव वापस ले लिया जायेगा. उन्होंने कहा अगर किसान जमीन देने के लिए तैयार नहीं होंगे तो प्रदेश सरकार जेवर में एयरपोर्ट के प्रस्ताव को वापस ले लेगी. जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जाएगा. imgpsh fullsize 92n क्या है किसानों की मांग ? दरअसल किसान सर्किल रेट से चार गुना ज्यादा के मुआवजा की मांग कर रहे है. इस समय इन गांवों को सर्किल रेट लगभग 903 रुपये प्रति वर्ग मीटर है जबकि किसान 3612 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा देने की मांग पर अड़े हुए हैं. यमुना प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने बुधवार को छह गांवों के प्रधान और किसानों से बातचीत की. उन्होंने बताया कि पहले प्रशासन ने 1806 रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा तय किया था. मुख्यमंत्री ने अब 500 रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा और बढ़ा दिया है. हालांकि किसान इस पर भी राजी नहीं हैं. सरकार ने सुझाया यह फार्मूला मुख्यमंत्री के निर्देश पर दोनों अधिकारियों ने जीबीयू में किसानों के साथ बैठक कर उनके सामने मुआवजे के लिए दो विकल्प रखे. पहले विकल्प में किसानों को जमीन के एवज में 23 सौ रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजे के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी या पांच लाख रुपये एक मुश्त, विस्थापन पर मकान बनाने के लिए पचास वर्गमीटर भूखंड, भवन के इंफ्रास्ट्रक्चर का मुआवजा आदि मिलेगा. दूसरे विकल्प में किसानों को 25 सौ रुपये प्रति वर्गमीटर का मुआवजा मिलेगा, लेकिन किसी तरह की अतिरिक्त सुविधा नहीं मिलेगी. imgpsh fullsize 93 गेंद किसानों के पाले में सरकार की तरफ से सुझाव देने के बाद अब गेंद किसानो के पाले में है. अगर वो इन फार्मूला पर सहमति बनाते है तो जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया जायेग लेकिन अगर किसान इस पर अपनी सहमति नहीं जताते है तो यह प्रस्ताव किसी और राज्य को दे दिया जायेगा. हरियाणा को यह प्रोजेक्ट दे जाने की ज्यादा संभावनाये है.
JB

Jatin Bhutani

जतिन भुटानी News4Social के संवाददाता हैं। वे दिल्ली-एनसीआर और राष्ट्रीय खबरों को कवर करते हैं, और स्थानीय व राष्ट्रीय घटनाक्रम पर तथ्यपरक रिपोर्टिंग करते हैं। सभी लेख देखें →

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