अमेरिकी हमले के बाद चर्चा में ईरान-इराक का शलामचेह बॉर्डर: क्यों है यह व्यापार और आस्था का अहम केंद्र?
ईरान और इराक को जोड़ने वाला शलामचेह बॉर्डर क्रॉसिंग एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। यह क्रॉसिंग दोनों देशों के लिए सिर्फ एक सीमा चौकी नहीं, बल्कि व्यापार, आस्था और सामरिक रिश्तों का एक…
ईरान और इराक को जोड़ने वाला शलामचेह बॉर्डर क्रॉसिंग एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। यह क्रॉसिंग दोनों देशों के लिए सिर्फ एक सीमा चौकी नहीं, बल्कि व्यापार, आस्था और सामरिक रिश्तों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। हाल ही में यहां हुए एक अमेरिकी हमले के बाद इसकी अहमियत और बढ़ गई है, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि अमेरिका ने लगातार 12वीं रात ईरान के कई शहरों और इलाकों पर बमबारी की। इसी कड़ी में शलामचेह बॉर्डर क्रॉसिंग को भी निशाना बनाया गया। ईरान की मेहर समाचार एजेंसी ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस हमले के बावजूद श्रद्धालुओं की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा और सीमा पर राहत कार्यों के साथ-साथ यात्रा सामान्य रूप से जारी रही।
व्यापार और तीर्थयात्रा का संगम
दक्षिणी इराक को ईरान से जोड़ने वाला यह बॉर्डर दोनों देशों के बीच वस्तुओं के आयात-निर्यात और लोगों की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हर दिन हजारों यात्री और व्यापारी इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। व्यावसायिक महत्व के अलावा, यह इराक में स्थित शिया समुदाय के पवित्र धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए भी एक प्रमुख प्रवेश द्वार है।
अरबईन के दौरान बढ़ जाता है महत्व
शलामचेह सीमा चौकी का सबसे अधिक महत्व 'अरबईन' के दौरान देखने को मिलता है, जो दुनिया के सबसे बड़े वार्षिक धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस दौरान लाखों शिया श्रद्धालु इराक के पवित्र शहर करबला की यात्रा करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, इस अवसर पर शलामचेह बॉर्डर से गुजरने वाले यात्रियों की संख्या करीब 20 लाख (2 मिलियन) तक पहुंच जाती है। इस साल अरबईन का आयोजन अगस्त की शुरुआत में होना है और श्रद्धालुओं की यात्रा पहले ही शुरू हो चुकी है।
व्यापार, तीर्थयात्रा और क्षेत्रीय संपर्क में इसकी अहम भूमिका को देखते हुए, इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी घटना का असर सिर्फ ईरान-इराक पर ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के सुरक्षा और भू-राजनीतिक हालात पर भी पड़ सकता है।
इनपुट: IANS



