कूनो: चीता शावक की गोली लगने से मौत के बाद एक्शन, 6 वनकर्मी निलंबित, 8 पर FIR
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के एक नर चीता शावक की गोली लगने से हुई मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। इस घटना के बाद अब तक छह वनकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि आठ…
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के एक नर चीता शावक की गोली लगने से हुई मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। इस घटना के बाद अब तक छह वनकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि आठ संदिग्धों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मुरैना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है और एसटीएफ ने भी तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
घटना 25 अक्टूबर की है, जब मादा चीता निर्वा के शावक 'केएनजी22' को श्योपुर के वन क्षेत्र में गंभीर रूप से घायल पाया गया था। उसे तुरंत रेस्क्यू कर जबलपुर के पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ले जाया गया। सीटी स्कैन से पता चला कि उसके शरीर के अंदरूनी अंगों, हड्डियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति पहुंची थी। ऑपरेशन के दौरान उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई।
जांच और विभागीय कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एनटीसीए और डब्ल्यूसीसीबी की एक उच्चस्तरीय टीम को जांच के लिए भेजा है। यह तीन सदस्यीय टीम घटनास्थल का मुआयना करने के साथ-साथ सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा करेगी। इसके अलावा, मध्य प्रदेश सरकार ने भी वन विभाग और पुलिस अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष जांच दल (एसटीएफ) का गठन किया है।
लापरवाही के आरोपों के तहत ग्वालियर वन वृत्त के सीसीएफ ने श्योपुर और मुरैना वन मंडलों के छह वनकर्मियों को निलंबित किया है। निलंबित होने वालों में विजयपुर के रेंजर जाहर सिंह गौड़ और पहाड़गढ़ के रेंजर आकाश तोमर के अलावा डिप्टी रेंजर कीर्ति शांडिल्य और अन्य मैदानी कर्मचारी शामिल हैं।
निगरानी तकनीक पर पार्क डायरेक्टर की सफाई
इस बीच, कूनो नेशनल पार्क के डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने सैटेलाइट कॉलर से वन्यजीवों की निगरानी की तकनीकी सीमाओं को लेकर एक विस्तृत बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि कॉलर से चीतों की लोकेशन आमतौर पर छह घंटे के अंतराल पर मिलती है, जिसमें घने जंगल या खराब मौसम के कारण 12 घंटे या उससे अधिक का अंतर भी हो सकता है। उनके मुताबिक, एक कॉलर की कीमत 4 से 5 लाख रुपए होती है और यह किसी जानवर का लाइव प्रसारण नहीं करता।
हालांकि, उनके इस स्पष्टीकरण पर वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे 'असफल अफसर का अंग्रेजी में सजावटी वक्तव्य' करार देते हुए उत्तम शर्मा को पद से हटाने की मांग की है। दुबे ने आरोप लगाया कि शर्मा के कार्यकाल में पहले भी कूनो में कई तेंदुओं का शिकार हुआ है और दो स्निफर डॉग की मौत हो चुकी है।
इनपुट: IANS



