सऊदी अरब पर हमले: UAE ने कहा- हम सभी निशाने पर, खाड़ी देशों की सामूहिक सुरक्षा ज़रूरी
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक शीर्ष अधिकारी ने खाड़ी देशों की साझा सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल मजबूत करने की पुरजोर वकालत की है। यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गाश ने कहा है कि सऊदी अरब पर हो…
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक शीर्ष अधिकारी ने खाड़ी देशों की साझा सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल मजबूत करने की पुरजोर वकालत की है। यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गाश ने कहा है कि सऊदी अरब पर हो रहे हालिया हमले इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि इस क्षेत्र के सभी देश निशाने पर हैं और किसी एक की सुरक्षा को दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनवर गर्गाश ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब को निशाना बनाना यूएई समेत सभी खाड़ी देशों की सुरक्षा को कमजोर करने जैसा है। उनके मुताबिक, साझा सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग की उपेक्षा ने दूसरे पक्षों को इस क्षेत्र के खिलाफ अपनी गतिविधियां बढ़ाने का मौका दिया है।
क्यों उठी यह मांग?
यह बयान यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर लगातार किए जा रहे हमलों के बाद आया है। हाल ही में, शनिवार की रात विद्रोहियों ने रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया था, जिसमें एक भारतीय नागरिक सहित 13 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज़्यादा लोग घायल हो गए। इस हमले की वैश्विक स्तर पर निंदा हो रही है और इसे तनाव बढ़ाने वाला एक खतरनाक कदम बताया जा रहा है।
हमलों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। रविवार को हूती विद्रोहियों ने फिर से रियाद हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 और टर्मिनल-4 को निशाना बनाया, जिनका इस्तेमाल घरेलू उड़ानों के लिए होता है।
हमलों का प्रभाव और पिछला रिकॉर्ड
इन हमलों के बाद सऊदी सरकार ने रियाद हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन रोक दिया है। भारत की कई एयरलाइंस ने भी 14 या 15 अक्टूबर तक रियाद जाने वाली अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। विद्रोहियों ने रविवार को चेतावनी भी जारी की है कि सऊदी हवाई क्षेत्र और हवाई अड्डों का इस्तेमाल न किया जाए।
बताया जा रहा है कि 10 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर हुआ हमला पिछले एक दशक में सऊदी अरब पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक है। इससे पहले मई 2015 में कातिफ की एक शिया मस्जिद पर हुए हमले में 21 लोगों की जान चली गई थी, जिसकी जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।
अनवर गर्गाश ने अपने बयान में हमलावरों की मानसिकता पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हमलावरों की यह गलत धारणा रही कि युद्ध से बचने की कोशिश कर रहे खाड़ी देश सबसे कमजोर कड़ी हैं, लेकिन इन घटनाओं ने सभी को सतर्क कर दिया है।
इनपुट: IANS



