भगोड़े अपराधियों पर सरकार का शिकंजा: 5 साल में 36 देशों से 274 वांछित भारत लाए गए
केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से अब तक 36 अलग-अलग देशों से कुल 274…
केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से अब तक 36 अलग-अलग देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया गया है। सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए इसे देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया है।
इस अभियान के तहत, मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) को सख्ती से लागू किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 2019 से 2026 के बीच भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इसी अवधि में देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों से 18,762 करोड़ रुपए की सफल वसूली भी हुई है। लाए गए अपराधियों में आतंकवादी, गैंगस्टर, आर्थिक अपराधी और हत्या, बलात्कार जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं।
कानूनी और संस्थागत बदलाव
भगोड़ों पर कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने कई कानूनी और संस्थागत कदम उठाए हैं। 2019 में एनआईए और यूएपीए कानूनों में संशोधन किया गया, जिससे कार्रवाई का दायरा व्यक्तिगत आतंकियों और उनके विदेशी सपोर्ट नेटवर्क तक बढ़ गया। 2024 में लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों में पहली बार 'अनुपस्थिति में मुकदमा' (trial in absentia) का प्रावधान (BNS धारा 355 व 356) जोड़ा गया है, जिससे भगोड़ों पर उनकी गैर-मौजूदगी में भी मुकदमा चलाया जा सकेगा।
वैश्विक समन्वय और तकनीक का इस्तेमाल
इस सफलता के पीछे विभिन्न भारतीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठनों के बीच बेहतर समन्वय एक बड़ा कारण रहा है। 2022 में भारत द्वारा 90वीं इंटरपोल महासभा की मेजबानी के बाद वैश्विक सहयोग बढ़ा है। इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में भी लगातार वृद्धि देखी गई है। CBI ने एक विशेष 'ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर' स्थापित किया है जो इंटरपोल के जरिये दुनियाभर की पुलिस से रियल-टाइम समन्वय करता है। इसके अलावा, 'ऑपरेशन त्रिशूल' के तहत भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए सैटेलाइट और डिजिटल फुटप्रिंट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इनपुट: IANS



