शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

विचाराधीन कैदियों को डिजिटल कानूनी सहायता: अनावश्यक जेल-अवधि खत्म करने की सरकारी पहल

केंद्र सरकार की एक नई पहल का उद्देश्य विचाराधीन कैदियों (अंडरट्रायल) को समय पर न्याय दिलाना और यह सुनिश्चित करना है कि अदालती आदेश के बाद उन्हें अनावश्यक रूप से जेल में न रहना पड़े। समाचार एजेंसी…

विचाराधीन कैदियों को डिजिटल कानूनी सहायता: अनावश्यक जेल-अवधि खत्म करने की सरकारी पहल
(फोटो: IANS)

केंद्र सरकार की एक नई पहल का उद्देश्य विचाराधीन कैदियों (अंडरट्रायल) को समय पर न्याय दिलाना और यह सुनिश्चित करना है कि अदालती आदेश के बाद उन्हें अनावश्यक रूप से जेल में न रहना पड़े। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभियान के तहत डिजिटल कानूनी सहायता सेवाओं को देश के ग्रामीण और तहसील स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इस संबंध में केंद्रीय कानून राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए।

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केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि पहले की व्यवस्था में, अदालत से रिहाई का आदेश जारी होने के बाद भी उसे जेल अधीक्षक तक पहुंचने में तीन से चार दिन लग जाते थे, जिससे कैदियों को बेवजह जेल में रहना पड़ता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से अब इस तरह की देरी को खत्म करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

डिजिटल कानूनी सहायता का विस्तार

मंत्री मेघवाल ने कहा कि सरकार चाहती है कि इस क्षेत्र में काम कर रहे एनजीओ और ट्रस्ट भी इस अभियान से जुड़ें। उन्होंने संविधान की भावना का उल्लेख करते हुए कहा, "केवल वही व्यक्ति जेल में रहे, जिसे कानून के अनुसार जेल में रहना आवश्यक हो। किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से जेल में नहीं रहना चाहिए।" महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोधा ने भी इस बात पर जोर दिया कि अर्जुन राम मेघवाल डिजिटल कानूनी सेवाओं को छोटे गांवों और तहसीलों तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो राज्य के कानून मंत्री भी हैं, इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।

कानूनी सहायता की पहुंच और चुनौतियाँ

भारत के उप महाधिवक्ता प्रवीण फलदेसाई ने मुफ्त कानूनी सहायता की पहुंच में आने वाली बाधाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने 'दर्द से हमदर्द तक ट्रस्ट' के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि यह संगठन वर्षों से सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, "काम के दौरान यह महसूस हुआ कि मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था होने के बावजूद कई विचाराधीन कैदियों (अंडरट्रायल) और दोषियों तक इसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा था।" फलदेसाई के अनुसार, ट्रस्ट ने इस कमी को दूर करने और मौजूदा कानूनी सहायता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रयास किए हैं।

उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी

इस अवसर पर मंत्री मंगल प्रभात लोधा ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा 18 जुलाई को नागपुर में 'राम रक्षा स्तोत्र' का पाठ करने की योजना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह अच्छी बात है। देर आए, दुरुस्त आए।" लोधा ने इसे उद्धव ठाकरे की भगवान राम में बढ़ी हुई आस्था बताते हुए खुशी जाहिर की। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक घटना के आधार पर भगवान राम को बदनाम करना उचित नहीं है और संबंधित मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की जा चुकी है, जिसमें किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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