कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पानी नहीं छोड़ रहा कर्नाटक, DMK का संसद में आरोप
कावेरी जल विवाद और हिंदी भाषा थोपने के मुद्दे पर द्रमुक (DMK) ने बुधवार को संसद में केंद्र और कर्नाटक सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश के बावजूद कर्नाटक…
कावेरी जल विवाद और हिंदी भाषा थोपने के मुद्दे पर द्रमुक (DMK) ने बुधवार को संसद में केंद्र और कर्नाटक सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश के बावजूद कर्नाटक सरकार तमिलनाडु के हिस्से का पानी नहीं छोड़ रही है, जिससे राज्य में किसानों और आम लोगों के लिए संकट खड़ा हो गया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, द्रमुक सांसद पी. विल्सन ने मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि तमिलनाडु सरकार ने 7,000 क्यूसेक पानी की मांग के लिए कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने बताया कि यह संकट के समय छोड़ा जाने वाला पानी है। समिति ने 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया, जिसकी पुष्टि भी हो चुकी है, लेकिन कर्नाटक सरकार अब तक इस आदेश का पालन नहीं कर रही है।
सड़क से संसद तक विरोध
पी. विल्सन ने यह भी बताया कि द्रमुक ने इस मुद्दे पर हाल ही में एक बड़ा आंदोलन किया था, जिसके कारण उदयनिधि स्टालिन को "झूठे आरोपों" में गिरफ्तार किया गया। पार्टी का कहना है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों का पालन न होने से तमिलनाडु के किसानों में भारी नाराजगी है और इससे राज्य में खेती व पेयजल पर गहरा असर पड़ रहा है। द्रमुक ने इस मामले पर सड़क से लेकर संसद तक विरोध जारी रखने का ऐलान किया है।
हिंदी थोपे जाने का भी आरोप
सांसद पी. विल्सन ने टीवीके सरकार द्वारा रुपए के निशान की जगह 'आरयू' के इस्तेमाल का बचाव करते हुए हिंदी भाषा थोपने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु में किसी भी रूप में हिंदी थोपे जाने को मंजूरी नहीं है। जब द्रमुक सरकार सत्ता में थी, तो उसने रुपए के लिए 'रुबाई' या 'आरयू' शब्द का इस्तेमाल किया था क्योंकि तमिलनाडु में हिंदी से निकले शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाता था।"
सदन में विपक्ष की भूमिका पर बयान
वहीं, द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा ने सदन में विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की मांगों और नोटिस का सम्मान नहीं करती, जिसके कारण उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए शोर मचाने पर मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा, "सदन को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी दोनों पक्षों की है... फिर ऐसी तस्वीर पेश की जाती है, जैसे हम अनुशासनहीन या उग्र हैं।"
इनपुट: IANS



