विजयवर्गीय के RSS वाले बयान पर पटवारी का तीखा हमला — राष्ट्रपति और राज्यपाल से संज्ञान लेने की माँग
मध्य प्रदेश में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। बयान में उन्होंने स्वीकार किया था कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद अधिकारी और कर्मचारी खुद को राष्ट्रीय स्
मध्य प्रदेश में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। बयान में उन्होंने स्वीकार किया था कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद अधिकारी और कर्मचारी खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा बताने लगते हैं। इस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सीधे राष्ट्रपति और राज्यपाल का दरवाज़ा खटखटाने की माँग कर दी है।
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पटवारी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि विजयवर्गीय का यह सार्वजनिक बयान "अत्यंत गंभीर संवैधानिक प्रश्न" खड़ा करता है।
संविधान की दुहाई देकर उठाए सवाल
पटवारी ने अपनी आपत्ति को महज राजनीतिक आरोप तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने तर्क दिया कि यदि प्रशासनिक तंत्र में किसी वैचारिक संगठन से जुड़ी पहचान का चलन बढ़ रहा है, तो यह "भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता, तटस्थता और संवैधानिक मर्यादा से जुड़ा गहरा और गंभीर विषय है।"
उन्होंने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि संविधान की अपेक्षा है कि "शासन का प्रत्येक अधिकारी संविधान के प्रति निष्ठावान हो, किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन के प्रति नहीं।" इसी आधार पर उन्होंने इस कथन की संवैधानिक समीक्षा को ज़रूरी बताया।
राज्यपाल और राष्ट्रपति से तीन सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्यपाल और राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे इस बयान का संज्ञान लें और मध्य प्रदेश सरकार से तत्काल तीन बिंदुओं पर जवाब माँगें —
पहला, क्या मध्य प्रदेश सरकार कैलाश विजयवर्गीय के कथन से सहमत है?
दूसरा, क्या प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान किसी वैचारिक संगठन से जुड़ी होनी चाहिए?
तीसरा, क्या मुख्यमंत्री इस बयान से खुद को अलग मानते हैं या इसका समर्थन करते हैं?
फ़िलहाल भाजपा या राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में प्रशासनिक निष्पक्षता के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।
इनपुट: IANS



