सोमवार, 10 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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जस्टिस अश्वनी मिश्रा की नियुक्ति पर अरविंद केजरीवाल ने उठाए सवाल, न्यायिक पारदर्शिता पर बहस

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की एक हालिया सिफारिश पर सवाल खड़े किए हैं, जिससे न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदोन्नति में पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है…

जस्टिस अश्वनी मिश्रा की नियुक्ति पर अरविंद केजरीवाल ने उठाए सवाल, न्यायिक पारदर्शिता पर बहस
(फोटो: IANS)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की एक हालिया सिफारिश पर सवाल खड़े किए हैं, जिससे न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदोन्नति में पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश से जुड़ा है।

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आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए न्यायिक पदोन्नति की प्रक्रिया पर चिंता जताई। उन्होंने लिखा, "ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट जाने की बहुत जल्दी है। क्या जजों को सीनियरिटी को नजरअंदाज करके, बिना बारी के सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट किया जाना चाहिए? इससे 'लेनदेन' की गुंजाइश बन सकती है।"

नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न

केजरीवाल ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसी जज को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने से पहले किन मानदंडों की जांच की जाती है। उन्होंने सवाल किया, "क्या शासक के प्रति वफादारी देखी जाती है? क्या लोगों को यह पता नहीं होना चाहिए?" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपारदर्शी और वरिष्ठता को नजरअंदाज कर की जाने वाली पदोन्नतियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, खासकर उन मामलों में जहां सरकार को खुश करने के लिए कानून को ताक पर रखने के आरोप हों। लोकतंत्र की रक्षा के लिए अदालतों की ईमानदारी को उन्होंने सबसे ज़रूरी बताया।

कौन हैं जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा?

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा वर्तमान में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कार्यरत हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इसी साल जून में उनकी नियुक्ति की थी। 16 नवंबर 1968 को जन्मे जस्टिस मिश्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल करने के बाद 1993 में वकालत शुरू की थी।

उन्होंने मुख्य रूप से दीवानी, संवैधानिक और सेवा कानून के क्षेत्र में अभ्यास किया और कई सार्वजनिक निकायों के वकील रहे। उन्हें 2013 में वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया था। जस्टिस मिश्रा 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। हाल ही में उनका तबादला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में हुआ है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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