JPSC मेधा घोटाला: 10 रुपये के नोट का कोड, होटल में सेटिंग — चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं से जुड़े चर्चित मेधा घोटाले में अब पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते समेत 12 आरोपियों पर मुकदमा चलेगा। रांची की एक विशेष अदालत ने आपराधिक जांच विभाग (CID) द्वारा…
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं से जुड़े चर्चित मेधा घोटाले में अब पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते समेत 12 आरोपियों पर मुकदमा चलेगा। रांची की एक विशेष अदालत ने आपराधिक जांच विभाग (CID) द्वारा दायर 97 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर की तारीख तय की गई है।
यह मामला संगठित तौर पर परीक्षाओं में धांधली कर अयोग्य अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने से जुड़ा है। आरोपियों में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते और पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के अलावा परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और मुख्य मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी भी शामिल हैं। इन सभी को जुलाई-अगस्त में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं। मंगलवार को हुई सुनवाई में सभी 12 आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया।
घूसखोरी का अनोखा तरीका और करोड़ों का खेल
सीआईडी ने डिजिटल सबूतों, फॉरेंसिक रिपोर्ट्स और कॉल डिटेल्स के आधार पर घोटाले के तौर-तरीकों का पर्दाफाश किया है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए 5 लाख रुपये और अंतिम चयन की गारंटी के लिए 10 से 25 लाख रुपये वसूले जा रहे थे। जांच में सामने आया कि तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते घूस के इस खेल में '10 रुपये के नोट के सीरियल नंबर' को कोड के तौर पर इस्तेमाल करते थे। यह भी खुलासा हुआ है कि एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को बिना टेंडर के काम देने के बदले 2 करोड़ रुपये नकद और बिलिंग का 10% कमीशन तय हुआ था।
परिणाम से पहले ही लीक हो गया था डेटा
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आने से पहले ही तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने चयनित अभ्यर्थियों का पूरा डेटा लीक कर दिया था। उन्होंने परीक्षा एजेंसी के कर्मी मोहम्मद उस्मान को व्हाट्सएप पर 267 सफल उम्मीदवारों की गोपनीय जानकारी भेजी थी। इनमें सर्वाधिक 146 अभ्यर्थी बिहार, 82 उत्तर प्रदेश और 14 हरियाणा से थे। इसके अलावा, मुख्य परीक्षा के प्रश्न, उत्तर और श्रेणीवार कट-ऑफ भी पहले ही लीक कर दिए गए थे।
होटल से चलता था धांधली का मुख्यालय
चार्जशीट के अनुसार, मुख्य मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी ने रांची के स्टेशन रोड पर एक पूरा होटल 11 महीने के लिए लीज पर ले रखा था। इस होटल का इस्तेमाल अयोग्य अभ्यर्थियों को ठहराने और उनकी OMR शीट में हेरफेर करने के लिए एक गुप्त मुख्यालय के रूप में किया जाता था। जांच एजेंसी को ख्यांग्ते के आवास से 15 सफल अभ्यर्थियों की एक गोपनीय सूची और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर परीक्षा के 8 मूल एडमिट कार्ड भी मिले थे, जिनमें से 10 का चयन भी हो चुका था। चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि गिरफ्तारी से ठीक पहले ख्यांग्ते ने अपना मोबाइल फॉर्मेट कर और लैपटॉप तोड़कर डिजिटल सबूत नष्ट करने की कोशिश की थी।
इनपुट: IANS



