रांची में छात्रों का भारी विरोध: JPSC-JSSC विवाद पर विधानसभा घेराव, शहर किले में तब्दील
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्रों का गुस्सा उफान पर है। राज्य सरकार के साथ तीसरे दौर की वार्ता विफल होने के बाद, हजारों की संख्या में छात्र सोमवार को विधानसभा का घेराव करने…
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्रों का गुस्सा उफान पर है। राज्य सरकार के साथ तीसरे दौर की वार्ता विफल होने के बाद, हजारों की संख्या में छात्र सोमवार को विधानसभा का घेराव करने रांची की सड़कों पर उतर आए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल प्रदर्शन के कारण राजधानी में तनावपूर्ण माहौल है और प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है।
यह आंदोलन पिछले 17 दिनों से चल रहा है, लेकिन अब यह एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सभी विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और उनकी सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। रविवार से ही राज्य के अलग-अलग जिलों से छात्र बसों, ट्रेनों और निजी वाहनों से रांची पहुंचने लगे थे, जिनमें से कई ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और आसपास के बरामदों में रात बिताई।
प्रशासन की किलेबंदी और सुरक्षा उपाय
छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया है। विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163) लागू कर दी गई है। अरगोड़ा से विधानसभा तक जाने वाले रास्ते पर करीब 12 जगहों पर भारी बैरिकेडिंग की गई है, जिनमें से कई पर लोहे के नुकीले कंटीले तार भी लगाए गए हैं। रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है। इलाके में रैपिड एक्शन फोर्स सहित लगभग 2,000 अतिरिक्त पुलिस बल, दंगा नियंत्रण वाहन और वाटर कैनन तैनात हैं। सरकार ने पुलिस को संयम बरतने और अनावश्यक बल प्रयोग से बचने का निर्देश दिया है।
कंटीले तारों पर गरमाई राजनीति
बैरिकेड पर कंटीले तार लगाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा, "यह कोई भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है जहां कंटीले तार बिछाए जा रहे हैं।" भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि अपने हक की मांग कर रहे युवाओं के खिलाफ ऐसी बाड़ लगाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है और किसी भी छात्र के घायल होने पर सीधी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
इनपुट: IANS



