JPSC-JSSC नियुक्ति रद्द मामला: हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक बरकरार रखी, जांच की निगरानी करेंगे पूर्व जज
झारखंड में JPSC की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और JSSC-CGL परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अपनी रोक बरकरार रखी है। शुक्रवार को हुई…
झारखंड में JPSC की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और JSSC-CGL परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अपनी रोक बरकरार रखी है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि नियुक्ति प्रक्रिया में JPSC को दो-तीन साल लग जाते हैं और ऐसे में बड़ी संख्या में भर्तियां रद्द करने से उन अधिकारियों की नौकरी भी प्रभावित हो सकती है, जिनके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर कोई गड़बड़ी के सबूत नहीं हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में इन भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि अब तक सामने आए तथ्यों से यह लगता है कि सभी नियुक्तियां सही तरीके से नहीं हुईं, लेकिन यह भी सच है कि सभी नियुक्तियों में गड़बड़ी नहीं हुई है।
सरकार का पक्ष और जांच का दायरा
राज्य सरकार ने अपने शपथ पत्र में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया कथित अनियमितताओं से इस कदर प्रभावित हो गई थी कि सही और गलत तरीके से सफल हुए अभ्यर्थियों में फर्क करना मुश्किल था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में पूरी परीक्षा रद्द की जा सकती है।
सरकार ने बताया कि परीक्षा से जुड़े गोपनीय काम, जैसे प्रश्नपत्रों की छपाई और वितरण, आईसीएन टेक्नोलॉजी को दिए गए थे। इस मामले में एजेंसी के सीईओ सोमांश प्रकाश समेत 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 265 लोगों को नोटिस जारी हुआ है। जांच में यह भी सामने आया है कि अभ्यर्थियों को नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो में प्रश्नों के उत्तर रटाए गए थे। सरकार के मुताबिक, नेपाल ले जाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 सीजीएल परीक्षा में सफल भी हुए थे।
हाईकोर्ट ने नियुक्त की निगरानी समिति
भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की जांच की निगरानी के लिए हाईकोर्ट ने एक समिति का गठन किया है। अदालत ने हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को इस जांच की निगरानी का जिम्मा सौंपा है। उनकी सहायता के लिए सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके मलिक को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन और इंद्रजीत सिन्हा समेत अन्य ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय ने बहस की। JPSC का पक्ष अधिवक्ता संजय पीपरवाल ने रखा।
इनपुट: IANS



