मानस नेशनल पार्क: वन्यजीवों के साथ-साथ उनके भोजन और घर को बचाने की अनूठी मुहिम
असम के मानस नेशनल पार्क में संरक्षण का काम सिर्फ बाघ, गैंडे और हाथियों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को बचाने पर केंद्रित है जो इन जीवों के अस्तित्व की बुनियाद है। यहां जंगल की…
असम के मानस नेशनल पार्क में संरक्षण का काम सिर्फ बाघ, गैंडे और हाथियों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को बचाने पर केंद्रित है जो इन जीवों के अस्तित्व की बुनियाद है। यहां जंगल की 'थाली' यानी घास के मैदानों और प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए एक खामोश लेकिन महत्वपूर्ण कवायद चल रही है, ताकि दुर्लभ बंगाल फ्लोरिकन से लेकर विशाल हाथियों तक, पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ मजबूत किया जा सके।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत-भूटान सीमा पर स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीव संरक्षण के लिए एक व्यापक रणनीति अपना रहा है। हाल ही में पीआईबी, लखनऊ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के एक मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने मानस का दौरा कर संरक्षण से जुड़ी इन गतिविधियों को करीब से देखा। अधिकारियों का कहना है कि यहां किसी एक प्रजाति पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उसके पूरे प्राकृतिक आवास को बचाने पर जोर दिया जा रहा है।
घासभूमि का घटता दायरा और संरक्षण के प्रयास
वन अधिकारियों के मुताबिक, मानस में घास के मैदान हर साल लगभग 6.5 वर्ग किलोमीटर की दर से कम हो रहे हैं। आक्रामक वनस्पतियों का फैलाव भी इस चुनौती को बढ़ा रहा है, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए यांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी समस्या से निपटने के लिए पार्क में 16 विशेष प्रजातियों की घास की एक नर्सरी तैयार की गई है। यहां अलग-अलग प्लॉट में घास उगाई जाती है और तैयार होने पर उसे पार्क के उन हिस्सों में लगाया जाता है, जहां घासभूमि को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। यह पहल सीधे तौर पर हाथियों और गैंडों जैसे शाकाहारी जीवों के भोजन की उपलब्धता से जुड़ी है।
बंगाल फ्लोरिकन का संरक्षण
मानस नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर युवराज सिंह ढींगरा ने बताया कि पार्क की पहचान सिर्फ बड़े जानवरों से नहीं, बल्कि दुर्लभ बंगाल फ्लोरिकन जैसे पक्षियों से भी है। इस पक्षी और उसके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बंगाल फ्लोरिकन के संरक्षण के लिए मानस से उत्तर प्रदेश के दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में इसे बसाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
मानस की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान
मानस राष्ट्रीय उद्यान का नाम इसके बीच से बहने वाली मानस नदी पर पड़ा है। यह पार्क भूटान के रॉयल मानस नेशनल पार्क से सटा हुआ है, जिससे यह वन्यजीवों के लिए एक बड़ा और साझा पारिस्थितिकी तंत्र बन जाता है। मानस नाम का संबंध हिंदू नाग देवी 'मनसा' से भी जोड़ा जाता है, जो इसकी प्राकृतिक विरासत में एक सांस्कृतिक आयाम जोड़ता है। पार्क के भ्रमण के दौरान असम फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स की महिला सिपाहियों ने भी मीडिया प्रतिनिधिमंडल को घास की नर्सरी और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी।
इनपुट: IANS



