झारखंड भर्ती घोटाला: OMR शीट में हेरफेर से लेकर इंटरव्यू तक, हर स्तर पर हुई करोड़ों की 'सेटिंग'
झारखंड की सरकारी नौकरियों से जुड़े भर्ती घोटालों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, CID और SIT की पड़ताल में यह बात सामने आई…
झारखंड की सरकारी नौकरियों से जुड़े भर्ती घोटालों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, CID और SIT की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि परीक्षाओं के विज्ञापन से लेकर अंतिम इंटरव्यू तक, हर कदम पर एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था। इस पूरे खेल में पिछले तीन सालों में करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई, जिसकी जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी शुरू कर दी है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे 'मेरिट स्कैम' का मुख्य किरदार आउटसोर्सिंग एजेंसी TDPPL का पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी है। CID ने उसे तीसरी बार तीन दिन की रिमांड पर लिया है और उसकी पत्नी व भाई के साथ बैठाकर पूछताछ कर रही है।
कैसे काम करता था पूरा सिंडिकेट?
आरोपियों के बयानों से पता चला है कि भर्ती प्रक्रिया के हर चरण के लिए रेट तय थे। 11वीं से 14वीं JPSC परीक्षाओं में अंतिम चयन और इंटरव्यू में नंबर बढ़वाने के नाम पर करोड़ों कमाए गए। 14वीं JPSC में तो सामान्य और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के लिए रेट करीब एक करोड़ रुपये, जबकि अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए लगभग 80 लाख रुपये तक था।
JPSC की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने पूछताछ में 'ऊपरी दबाव' की बात कबूली है। उनके अनुसार, 11वीं, 13वीं और 14वीं JPSC के विवादित परिणाम तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के सीधे निर्देश और दबाव में जारी किए गए थे। हालांकि, उन्होंने खुद को किसी तकनीकी हेरफेर से अलग बताया है।
OMR शीट में ऐसे होती थी धांधली
इस घोटाले का सबसे अहम पहलू OMR शीट से छेड़छाड़ है। तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद एबाद के मुताबिक, पहले से तय अभ्यर्थियों की OMR शीट में उत्तर के गोले खाली छुड़वा दिए जाते थे। परीक्षा के बाद जब आधिकारिक आंसर-की आती, तो स्कैनिंग के दौरान उन खाली गोलों में सही जवाब भर दिए जाते थे। इसके लिए चुनिंदा रोल नंबर सीधे तकनीकी टीम को भेजे जाते थे। CID अब मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक मिलान कर रही है।
परीक्षा से पहले रटवाए गए जवाब
जांच में यह भी सामने आया है कि JSSC-CGL परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लेकर उन्हें परीक्षा से ठीक पहले एक जगह इकट्ठा किया गया। वहां उन्हें करीब 65 सवालों के जवाब रटवाए गए। एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि प्रश्नपत्र सिस्टम से बाहर कैसे लीक हुआ। इस मामले में अब तक पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत 25 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसी गड़बड़ी के कारण सरकार ने JSSC-CGL समेत 22 भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द कर दिया था।
इनपुट: IANS



