JPSC घोटाला: 5 मुख्य आरोपियों पर CID का शिकंजा, करोड़ों की 'मेधा-सौदेबाजी' का खुलासा
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में धांधली से जुड़े चर्चित घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, CID ने रांची की एक अदालत में बुधवार शाम…
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में धांधली से जुड़े चर्चित घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, CID ने रांची की एक अदालत में बुधवार शाम पांच मुख्य आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस कदम से गिरफ्तार आरोपियों के लिए 'डिफॉल्ट बेल' पर बाहर आने के रास्ते बंद हो गए हैं।
यह चार्जशीट 90 दिनों की वैधानिक अवधि समाप्त होने से ठीक पहले दायर की गई। अदालत ने मामले में पहली आधिकारिक सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। CID अब इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों और घोटाले से लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ जल्द ही एक पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
संगठित सिंडिकेट और करोड़ों की वसूली
CID की जांच रिपोर्ट और केस डायरी ने एक संगठित 'मेधा सिंडिकेट' का पर्दाफाश किया है, जो आयोग की गोपनीयता और परीक्षा प्रणाली में सेंध लगा रहा था। जांच में यह बात सामने आई है कि अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने की गारंटी के लिए बाकायदा एक 'रेट कार्ड' बनाया गया था। इसके तहत प्रारंभिक परीक्षा के लिए 5 लाख, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में अंक बढ़वाने के लिए 10 से 15 लाख, और अंतिम चयन सुनिश्चित करने के लिए 60 से 70 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूली जा रही थी।
ये हैं पांच मुख्य आरोपी
पहली चार्जशीट में जिन पांच लोगों को नामजद किया गया है, उनमें आयोग की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, घोटाले का मास्टरमाइंड और टीडीपीएल एजेंसी का निदेशक रामवीर सिंह उर्फ आरवी सिंह, मार्केटिंग मैनेजर व किंगपिन अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी, तथा एजेंसी के कर्मचारी मो. उस्मान और मो. एबाद शामिल हैं। इन पर भारतीय न्याय संहिता के साथ-साथ 'झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023' की कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कैसे होता था पूरा खेल?
फॉरेंसिक जांच और जब्त डिजिटल उपकरणों से पता चला है कि परीक्षार्थी अपनी OMR शीट खाली छोड़ देते थे, जिन्हें बाद में स्कैनिंग और बैकएंड सर्वर में सीधे हेरफेर करके भर दिया जाता था। इसके अलावा, आधिकारिक घोषणा से पहले ही गोपनीय आंसर-की व्हाट्सएप पर लीक कर दी गई थी। इसके बदले में तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक और उनके परिवार के लिए दिल्ली और बेंगलुरु की हवाई टिकटें बुक कराई गई थीं। अभ्यर्थियों से गारंटी के तौर पर उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, कोरे चेक और सादे कागज भी ले लिए जाते थे।
इनपुट: IANS



