दाऊद इब्राहिम को 'भारत-आधारित' बताने वाली UN रिपोर्ट पर भारत का कड़ा ऐतराज, विशेषज्ञ की मंशा पर उठाए सवाल
संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक विशेषज्ञ की रिपोर्ट में वांछित आतंकवादी दाऊद इब्राहिम को 'भारत में रहने वाला' बताए जाने पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारत ने इसे एक 'गंभीर और साफ दिखाई देने…
संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक विशेषज्ञ की रिपोर्ट में वांछित आतंकवादी दाऊद इब्राहिम को 'भारत में रहने वाला' बताए जाने पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारत ने इसे एक 'गंभीर और साफ दिखाई देने वाली गलती' करार देते हुए कहा कि ऐसी गलत जानकारी संयुक्त राष्ट्र की साख को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह विरोध भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने बुधवार को दर्ज कराया।
यह पूरा विवाद मानवाधिकार और आतंकवाद मामलों के विशेष रिपोर्टर बेन सॉल द्वारा जुलाई में जारी एक रिपोर्ट से शुरू हुआ। इस रिपोर्ट में आतंकवादी संबंधों वाले आपराधिक गिरोह 'डी-कंपनी' के सरगना दाऊद इब्राहिम को 'भारत-आधारित' बताया गया था। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि उसे अल-कायदा से संबंधों के कारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में डाला गया था।
भारत ने तथ्यों को सही किया
रघु पुरी ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखते हुए कहा, "अगर इस लाइन को अकेले पढ़ा जाए तो यह वास्तविक स्थिति से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि डी-कंपनी और उसका सरगना दाऊद इब्राहिम 1993 के आतंकी हमलों के बाद से ही भारत में वांछित हैं। पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि दाऊद 2003 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने से बहुत पहले ही भारत से भाग चुका था।
उन्होंने कहा, "भारत से बाहर रहते हुए ही उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से संबंधों के कारण प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया था।" पुरी ने याद दिलाया कि दाऊद आज भी भारत में एक वांछित अपराधी है और संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों के अनुसार, "वह उसी देश में रह रहा है, जहां ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ पाया गया था।"
विशेषज्ञ की योग्यता और फंडिंग पर सवाल
भारतीय प्रतिनिधि ने रिपोर्ट तैयार करने में 'अयोग्यता' का आरोप लगाया और कहा कि रिपोर्ट में इस तथ्य का जिक्र न करना दुर्भाग्यपूर्ण है कि दाऊद भारत के बाहर रहता है और भारत उसे लंबे समय से तलाश रहा है। उन्होंने कहा, "ऐसे विशेष पदाधिकारियों की यह अयोग्यता संयुक्त राष्ट्र को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाती है।"
इस बीच, निगरानी संगठन 'यूएन वॉच' के एक डेटाबेस के हवाले से बेन सॉल की फंडिंग पर भी सवाल उठाए गए हैं। 'यूएन वॉच' के अनुसार, सॉल को चीन से 1,50,000 डॉलर की फंडिंग मिली है। सिडनी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर रहे सॉल को कुल 1.7 मिलियन डॉलर का वित्तीय सहयोग मिला है, जिसमें उनके विश्वविद्यालय के अलावा अमेरिका, स्विट्जरलैंड और स्पेन की संस्थाओं का भी योगदान है।
पाकिस्तान को भी दिया जवाब
पुरी ने कश्मीर का मुद्दा उठाने पर पाकिस्तान को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ लगाए गए आरोप, जिनमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का जिक्र शामिल है, पाकिस्तान के 'वास्तविक शासकों', यानी उसकी सेना की ओर से किया गया एक संकीर्ण राजनीतिक प्रचार है। उन्होंने रिकॉर्ड पर दोहराया कि "जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं, हमेशा रहे हैं और हमेशा रहेंगे।"
इनपुट: IANS



