गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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जॉर्डन का एयरबेस ईरान के निशाने पर क्यों? जानिए अमेरिका से इसका सीधा कनेक्शन

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब जॉर्डन पर भी दिखने लगा है। पिछले कुछ समय से ईरान लगातार जॉर्डन के मुवाफ्फक सलती एयरबेस, जिसे अल-अज्रक एयरबेस भी कहा जाता है, पर हमले कर रहा है। ईरान का…

जॉर्डन का एयरबेस ईरान के निशाने पर क्यों? जानिए अमेरिका से इसका सीधा कनेक्शन
(फोटो: IANS)

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब जॉर्डन पर भी दिखने लगा है। पिछले कुछ समय से ईरान लगातार जॉर्डन के मुवाफ्फक सलती एयरबेस, जिसे अल-अज्रक एयरबेस भी कहा जाता है, पर हमले कर रहा है। ईरान का मानना है कि यह बेस जॉर्डन की सैन्य संपत्ति से कहीं ज़्यादा, अमेरिकी सैन्य अभियानों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, और इसी वजह से यह उसके लिए एक वैध निशाना है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अल-अज्रक एयरबेस पर अमेरिकी सैनिकों और लड़ाकू विमानों की बड़ी मौजूदगी है। हालांकि यह बेस रॉयल जॉर्डेनियन एयर फोर्स के नियंत्रण में है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि जॉर्डन में तैनात लगभग 4,000 अमेरिकी सैनिकों के लिए यह एक प्रमुख ऑपरेशनल ठिकाना है। ईरान का तर्क है कि अमेरिका द्वारा ईरानी तेल टैंकरों पर किए गए हमलों जैसी कार्रवाइयों के जवाब में वह जॉर्डन स्थित इन अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।

रणनीतिक महत्व और हालिया हमले

अल-अज्रक एयरबेस की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। यह जॉर्डन की राजधानी अम्मान से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। यह अमेरिका को ईरान और मध्य-पूर्व के अन्य संघर्ष क्षेत्रों से एक सुरक्षित दूरी मुहैया कराता है। अल जजीरा के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका इस बेस का इस्तेमाल सीरिया और इराक के खिलाफ अभियानों के लिए भी करता रहा है। यहां F-35, F-16 और F-15 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों को ऑपरेट करने की क्षमता भी मौजूद है।

9 सितंबर को हुए ताज़ा हमले में जॉर्डन की सेना ने ईरान की 20 में से 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक देने का दावा किया। हालांकि, अमेरिकी रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में कुछ अमेरिकी सैन्य विमानों को नुकसान पहुंचा है। इससे पहले, मार्च से जारी हमलों के क्रम में जुलाई में हुए एक मिसाइल हमले में तीन अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत हो गई थी।

जॉर्डन की मुश्किल स्थिति

ईरान की इन कार्रवाइयों ने जॉर्डन को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। अम्मान अमेरिका का एक करीबी सुरक्षा सहयोगी है, लेकिन वह खुद को ईरान और अमेरिका के बीच सीधे संघर्ष में एक पक्ष के तौर पर नहीं देखता। ईरान का मुख्य निशाना जॉर्डन नहीं, बल्कि उसकी धरती पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचा है। इसके बावजूद, अपने यहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के कारण जॉर्डन इस तनाव की चपेट में आ गया है और इस संघर्ष में और गहराई से खिंचता जा रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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