नई दिल्ली: कुछ समय पहले तक जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) पत्थरबाजी के लिए बदनाम था. राज्य से धारा 370 और 35 A हटने के बाद यहां के हालात में जबर्दस्त सुधार आया. कश्मीरी के युवा अब आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) और मेक इन इंडिया (Make in India) जैसे अभियानों के साथ देश की तरक्की में हाथ बटा रहे हैं. कश्मीर के स्कूली बच्चों की सोच में जो भारत विरोधी बातें भरी गई थी. उसका असर भी धीरे धीरे खत्म हो रहा है. ऐसे ही नए कश्मीर की एक झलक छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा (IPS Officer Dipanshu Kabra) ने ट्विटर पर पोस्ट की है.
दिल जीतना भारतीयों के संस्कार
छत्तीसगढ़ के IPS अफसर दीपांशु काबरा ने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की है. जिसमें कश्मीर की घाटी में कुछ बच्चे हाथों में तिरंगा लिए बैठे हैं. वर्तमान में छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त परिवहन आयुक्त ने अपनी हालिया पोस्ट में जो कैप्शन दिया है उसकी चर्चा अब देशभर में हो रही है. उन्होंने कैप्शन में लिखा, दिल जीतना हम भारतीयों के संस्कार हैं, पड़ोसियों की जमीनें नहीं! #JammuAndKashmir में आतंक हार रहा है, #IndianArmedForces के प्रयास रंग ला रहे हैं!
देशहित में आप भी देखिए आईपीएस दीपांशु काबरा का ये ट्वीट
#PicOfTheDay :
दिल जीतना हम भारतीयों के संस्कार हैं, पड़ोसियों की ज़मीनें नहीं! #JammuAndKashmir में आतंक हार रहा है, #IndianArmedForces के प्रयास रंग ला रहे हैं!PC – @Ajaypandey_08 pic.twitter.com/0DJThEuTg8
— Dipanshu Kabra (@ipskabra) January 12, 2021
आईपीएस अधिकारी काबरा के नाम कई उपलब्धियां
आईपीएस दीपांशु सोशल मीडिया पर एक्टिव रहकर समय समय पर लोगों को जागरूक करने के लिए मशहूर हैं. उनके पास देशहित में ऐसी कई उपलब्धियां है जब उन्होंने अपनी ड्यूटी के इतर मानव सेवा और समाज सेवा के साथ लोगों को प्रेरित करने का भी काम किया.
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जम्मू-कश्मीर की वर्तमान स्थिति
बीते कुछ सालों ने कश्मीर घाटी में तेजी से आतंकवाद का सफाया हुआ है. आतंक के रास्ते पर बढ़े सैकड़ों युवा मुख्यधारा में वापस लौटे हैं. जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में कमी आई है. आम लोगों की खुशहाली बढ़ी है. रोजगार के मौके बढ़ें हैं. युवाओं को ऑनलाइन सरकारी योजनाओं की जानकारी और फायदा मिल रहा है. एक और बड़ा बदलाव आप ये मान सकते हैं कि जम्मू-कश्मीर (J&K) की राजनीति में सुधार आया है. सूबे की राजनीति में पहले कुछ रसूखदार परिवारों का कब्जा था लेकिन अब जनता कोई पैराशूट कैंडिडेट नहीं बल्कि अपने लोगों के बीच से नेता चुन रही है.

