झारखंड: दो महीने में चौथे हाथी की मौत, पश्चिमी सिंहभूम में मिला शव, वन विभाग पर उठे सवाल
झारखंड में हाथियों की मौत का चिंताजनक सिलसिला जारी है, जहाँ पिछले दो महीनों में यह चौथी ऐसी घटना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सबसे ताज़ा मामला राज्य के पश्चिमी सिंहभूम जिले से सामने आया है, जहाँ…
झारखंड में हाथियों की मौत का चिंताजनक सिलसिला जारी है, जहाँ पिछले दो महीनों में यह चौथी ऐसी घटना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सबसे ताज़ा मामला राज्य के पश्चिमी सिंहभूम जिले से सामने आया है, जहाँ बुधवार सुबह एक खेत में एक हाथी मृत अवस्था में पाया गया।
यह घटना बड़ाजामदा ओपी क्षेत्र के टंकुरा बस्ती के बुरमा टोली में हुई। स्थानीय ग्रामीणों ने बुधवार सुबह खेत में हाथी का शव देखकर अधिकारियों को सूचित किया। रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार शाम को ही लगभग 20 हाथियों का एक झुंड गाँव की सीमा में घुस आया था। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी, लेकिन मदद के लिए कोई टीम नहीं पहुँची। इसके बाद, ग्रामीणों ने खुद ही पूरी रात जागकर हाथियों को भगाने का प्रयास किया।
सुबह जब उन्हें हाथी का शव मिला, तो मौत का कारण स्पष्ट नहीं था। हालांकि, ग्रामीणों ने करंट लगने की आशंका जताई है। असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ पाएगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राज्य में हाथियों की मौत की हालिया घटनाएँ
पिछले कुछ समय में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हाथियों की मौत की कई घटनाएँ दर्ज की गई हैं।
- 28 अक्टूबर: लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र के बिशुनपुर जंगल में एक हाथी का शव मिला था। वन विभाग के रेंजर ने तब हाथियों के आपसी संघर्ष में मौत होने का अनुमान लगाया था।
- अक्टूबर की शुरुआत: पश्चिमी सिंहभूम के ही जगन्नाथपुर इलाके में एक मादा हाथी मृत पाई गई थी, जिसके दोनों दाँत गायब थे। इससे हाथी दाँत के लिए शिकार की आशंका को बल मिला था।
- 7 सितंबर: लातेहार के कोमर गाँव में बिजली के तार की चपेट में आने से एक हाथी की जान चली गई थी। यह हाथी फसल की सुरक्षा के लिए लगाए गए अवैध बिजली के तार का शिकार हुआ था।
झारखंड के जंगलों से सटे ग्रामीण इलाकों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही और इंसानी बस्तियों के साथ उनका टकराव एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। अपनी फसलों और घरों को बचाने के लिए लोगों द्वारा अपनाए जा रहे खतरनाक तरीके अक्सर इन वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।
इनपुट: IANS



