झारखंड नियुक्ति रद्द मामला: हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक बरकरार रखी, 48 घंटे में जवाब तलब
झारखंड में कई महत्वपूर्ण सरकारी परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अपनी रोक बरकरार रखी है। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने सरकार को इस…
झारखंड में कई महत्वपूर्ण सरकारी परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अपनी रोक बरकरार रखी है। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने सरकार को इस मामले में 48 घंटे के भीतर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और नवनियुक्त कर्मियों के भविष्य से जुड़ा है, जिसे देखते हुए अदालत ने इसमें किसी भी तरह की अनावश्यक देरी न करने की बात कही।
यह पूरा विवाद राज्य सरकार के उस फैसले से शुरू हुआ, जिसमें उसने परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी टीडीपीएल की भूमिका वाली सभी परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। प्रभावित परीक्षाओं में जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, सीडीपीओ, एफएसओ और जेएसएससी-सीजीएल जैसी प्रमुख भर्तियां शामिल थीं।
अदालत की सख्त टिप्पणी और अगली सुनवाई
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जांच की स्थिति पर शपथपत्र दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए सीआईडी जांच की गति पर भी सवाल उठाए और सरकार से समयबद्ध तरीके से अपनी स्थिति साफ करने को कहा। सरकार के वकील ने बताया कि सीआईडी जांच की प्रगति रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी जाएगी।
किसने रखा किसका पक्ष?
अदालत में सरकार के फैसले से प्रभावित कर्मचारियों और अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की थी, जिनका कहना है कि नियुक्तियों को सामूहिक रूप से रद्द करना उनके अधिकारों का हनन है। प्रार्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और चंचल जैन ने बहस की। वहीं, राज्य सरकार का पक्ष महाधिवक्ता के साथ सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने रखा। जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल पेश हुए। पिछली सुनवाइयों में भी हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए सरकारी आदेश पर रोक लगा दी थी।
इनपुट: IANS



