केरल में बिजली संकट: महंगी खरीद और सियासी हमलों के बीच घिरी सतीशन सरकार
केरल में लगातार हो रही बिजली कटौती वीडी सतीशन सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनकर उभरी है। राज्य इस समय बिजली की भारी कमी से जूझ रहा है, जिसके चलते सरकार को एनटीपीसी से लगभग 30…
केरल में लगातार हो रही बिजली कटौती वीडी सतीशन सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनकर उभरी है। राज्य इस समय बिजली की भारी कमी से जूझ रहा है, जिसके चलते सरकार को एनटीपीसी से लगभग 30 रुपए प्रति यूनिट जैसी महंगी दरों पर बिजली खरीदने पर विचार करना पड़ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट ने राज्य की बिजली व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है।
बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने मंगलवार को यह स्वीकार किया कि ऊँची कीमतों पर बिजली खरीदने के बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि इतनी महंगी खरीद से राज्य पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिसके लिए कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक होगी। हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मौजूदा बिजली कटौती का दौर कब तक जारी रहेगा, केवल इतना कहा कि सरकार इस संकट को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
विपक्ष का हमला और जनता पर असर
सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा इस स्थिति को नई सरकार की नाकामी बता रहा है। विपक्ष का तर्क है कि पिनाराई विजयन के 10 साल के कार्यकाल के दौरान राज्य में नियमित बिजली कटौती लगभग खत्म हो गई थी। अब आम लोग सीधे तौर पर इस कमी का असर झेल रहे हैं, जो सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है।
विशेषज्ञों की राय और व्यवस्था की खामियां
इंजीनियरिंग फिजिसिस्ट और बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञ के.एस. मनोज का मानना है कि यह संकट सिर्फ बिजली खरीदने में नाकामी का मामला नहीं है, बल्कि यह केरल की बिजली व्यवस्था की गहरी कमजोरियों को दिखाता है। इनमें बाहरी बिजली पर अत्यधिक निर्भरता, खरीद की लागत में उतार-चढ़ाव और मजबूत दीर्घकालिक योजना का अभाव शामिल है।
के.एस. मनोज ने लागत का अनुमान लगाते हुए कहा, "अगर 300 मेगावाट बिजली लगातार 30 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाती है तो सिर्फ बिजली का बिल ही एक दिन में करीब 2.16 करोड़ रुपए और 30 दिनों में लगभग 65 करोड़ रुपए बैठेगा।" उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि केएसईबी को एक पूर्णकालिक पेशेवर चेयरमैन और प्रबंध निदेशक की जरूरत है, जिसके पास तकनीकी ज्ञान और प्रबंधन क्षमता दोनों हो।
दीर्घकालिक रणनीति पर सवाल
इस संकट ने केरल की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य को अगले 15 से 20 वर्षों के लिए एक एकीकृत योजना की आवश्यकता है, जिसमें बढ़ती मांग, पनबिजली, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए। जब तक बिजली आपूर्ति स्थिर नहीं हो जाती, तब तक सतीशन सरकार को विपक्ष के हमलों का सामना करना पड़ेगा, जो इसे एक प्रशासनिक विफलता के रूप में पेश करता रहेगा।
इनपुट: IANS



