JSSC पेपर लीक: परीक्षा पास कर नौकरी पाने वाला एक और अभ्यर्थी गिरफ्तार, CID की जांच जारी
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा में हुए पेपर लीक और धांधली के मामले में एक और बड़ी कार्रवाई हुई है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम ने रविवार को एक…
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा में हुए पेपर लीक और धांधली के मामले में एक और बड़ी कार्रवाई हुई है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम ने रविवार को एक ऐसे अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया है, जो इस परीक्षा में सफल होकर नौकरी भी कर रहा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पहचान कुंदन कुमार के रूप में हुई है, जिस पर पेपर लीक करने वाले गिरोह को पैसे देकर फायदा उठाने का आरोप है।
कुंदन कुमार मूल रूप से पलामू जिले के नौडीहा बाजार थाना क्षेत्र के डुमरी गांव का रहने वाला है। वह JSSC-CGL परीक्षा पास करने के बाद गुमला जिले के सिसई में पदस्थापित था। CID की जांच में सामने आए सबूतों के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है।
कैसे काम कर रहा था पेपर लीक गिरोह?
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे घोटाले का तरीका बेहद सुनियोजित था। गिरोह के सदस्यों ने सबसे पहले आईसीएन एजेंसी के मिथिलेश सिंह से प्रश्नपत्र हासिल किए। इसके बाद, उन्होंने नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नों के उत्तर मुहैया करा दिए। कुंदन कुमार पर भी इसी तरह पैसे देकर उत्तर पाने का आरोप है, और इस मामले में उसकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है।
नेपाल में रटवाए गए थे 135 सवालों के जवाब
इस मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। CID के अनुसार, अब तक 125 से अधिक अभ्यर्थियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनमें से 28 अभ्यर्थियों के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। आरोप है कि गिरोह इन 28 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले नेपाल ले गया था, जहाँ उन्हें एक जगह बैठाकर 135 प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए थे। बाद में, मुख्य परीक्षा में इनमें से 120 प्रश्न हू-ब-हू पाए गए।
CID की कड़ी निगरानी और आगे की कार्रवाई
विशेष जांच टीम अब सभी संदिग्ध सफल अभ्यर्थियों और गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाल रही है। साथ ही, उनके बैंक खातों में हुए वित्तीय लेन-देन की भी बारीकी से जांच की जा रही है। CID अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी भी अभ्यर्थी का पेपर लीक गिरोह से संपर्क या परीक्षा में धोखाधड़ी साबित होती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में, नौकरी पा चुके चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी जांच के नतीजों के आधार पर रद्द हो सकती है।
इनपुट: IANS



