झारखंड नियुक्ति रद्द मामला: JSSC-CGL और CDPO पर सरकारी आदेश के अमल पर भी हाईकोर्ट की रोक
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत JSSC-CGL (संयुक्त स्नातक स्तरीय) और CDPO (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था…
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत JSSC-CGL (संयुक्त स्नातक स्तरीय) और CDPO (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया।
यह लगातार दूसरा दिन था जब अदालत ने सरकार के नियुक्ति रद्द करने संबंधी फैसलों पर रोक लगाई है। इससे एक दिन पहले, गुरुवार को, कोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर भी इसी तरह की अंतरिम रोक लगा दी थी।
सरकार को देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने शुक्रवार की सुनवाई में राज्य सरकार और संबंधित आयोगों से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि इन परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का आधार क्या था और जांच में कौन से तथ्य सामने आए थे। सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 7 सितंबर तक का समय दिया गया है। वहीं, याचिकाकर्ताओं को सरकार के जवाब पर अपना प्रति-उत्तर 14 सितंबर तक दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, झारखंड सरकार ने 18 अगस्त की देर रात एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CID जांच का हवाला देकर कई भर्ती प्रक्रियाओं पर कार्रवाई की थी। सरकार ने कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह की प्रक्रिया स्थगित करने और 2014 से हुई 17 अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने की घोषणा की थी।
सरकार के इसी फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गईं। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। वहीं, सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत से सभी संबंधित मामलों में सरकार को शपथपत्र दाखिल करने के लिए एक निश्चित समयसीमा देने का आग्रह किया।
इनपुट: IANS



