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झारखंड स्वास्थ्य विभाग को दो स्कॉच गोल्डन अवार्ड, राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

झारखंड के स्वास्थ्य विभाग को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दो स्कॉच गोल्डन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर कार्यक्रम और एक विशेष प्रचार वाहन नवाचार के लिए मिला। इन पहलों के परिणामस्वरूप राज्य में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है।

झारखंड स्वास्थ्य विभाग को दो स्कॉच गोल्डन अवार्ड, राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
प्रतीकात्मक तस्वीर

झारखंड के स्वास्थ्य विभाग ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से किए गए अभिनव कार्यों के लिए स्कॉच अवार्ड की गोल्डन कैटेगरी में दो पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर बेहतर बनाने के प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है।

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किन नवाचारों को मिला सम्मान?

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग को यह दोहरा पुरस्कार दो प्रमुख पहलों के लिए प्रदान किया गया है। पहला, होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (एचबीएनसी) और होम बेस्ड यंग चाइल्ड (एचबीवाईसी) कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन के लिए। दूसरा, एक विशेष प्रचार वाहन (टीआईटी) के नवाचार के लिए, जिसने स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई।

इन कार्यक्रमों के तहत किए गए प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:

  • पूरे राज्य के सभी 24 जिलों में 24 अलग-अलग स्वास्थ्य विषयों पर विशेष प्रचार वाहन चलाए गए। यह अभियान करीब 4 महीने तक जारी रहा।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कुल 192 प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 5,576 लोगों को प्रशिक्षित किया गया।
  • डिजिटल डेटा प्रबंधन के लिए 'सहिया ऐप' और 'शिशु पोषण ट्रैकर' जैसे उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया।

अभियान का सकारात्मक प्रभाव

इन प्रयासों का सीधा असर स्वास्थ्य संकेतकों पर देखने को मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन पहलों के कारण कुपोषण उपचार केंद्रों (एमटीसी) और विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) में रेफरल की दर में 50 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसका परिणाम यह हुआ है कि झारखंड में शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में काफी कमी आई है।

यह पुरस्कार अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने ग्रहण किया, जिसे प्रो. महेंद्र देव और डॉ. मनोज कुमार ने प्रदान किया। गौरतलब है कि स्कॉच (SKOCH), जिसकी स्थापना 1997 में हुई थी, भारत का एक प्रमुख स्वतंत्र थिंक-टैंक है जो सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर काम करता है।

विभाग के इन नवोन्मेषी प्रयासों से यह स्पष्ट है कि आम लोगों को उनके क्षेत्र में ही न्यूनतम खर्च पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।

विषयझारखंड
DN

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