बुधवार, 22 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

रामपुर: जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर का खतरा, 3000 छात्रों के भविष्य को लेकर जमात-ए-इस्लामी हिंद ने की राज्यपाल से अपील

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के आदेश पर चिंता गहरा गई है। इस मामले में जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIH) ने दखल देते हुए विश्वविद्यालय के खिलाफ किसी भी…

रामपुर: जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर का खतरा, 3000 छात्रों के भविष्य को लेकर जमात-ए-इस्लामी हिंद ने की राज्यपाल से अपील
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के आदेश पर चिंता गहरा गई है। इस मामले में जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIH) ने दखल देते हुए विश्वविद्यालय के खिलाफ किसी भी तरह की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने रामपुर का दौरा कर जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें हजारों छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की रक्षा की गुहार लगाई गई है।

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संगठन ने इस बात पर जोर दिया है कि ध्वस्तीकरण के लिए 30 जुलाई की समय-सीमा तय की गई है, और अगर यह कार्रवाई होती है तो इससे लगभग 3,000 छात्रों की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ेगा। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, विश्वविद्यालय की कुल 40 इमारतों में से 38 को गिरा दिए जाने से संस्थान का अस्तित्व ही लगभग समाप्त हो जाएगा।

राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

जमात-ए-इस्लामी हिंद ने राज्यपाल से छात्रों के शिक्षा के अधिकार और संस्थान की संवैधानिक पहचान की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि ध्वस्तीकरण आदेश की वैधता और विश्वविद्यालय द्वारा उठाए गए अधिकार क्षेत्र संबंधी सवालों के समाधान के लिए मामले को सक्षम न्यायालय के समक्ष रखा जाए, ताकि फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत हो सके।

छात्रों के भविष्य और विकल्पों पर जोर

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्र पढ़ते हैं, जिनमें से कई को फीस में रियायत भी मिलती है। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि ध्वस्तीकरण के बजाय इमारतों के नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) जैसे विकल्पों पर विचार किया जाए, ताकि किसी भी छात्र की शिक्षा प्रशासनिक कार्रवाई की वजह से बाधित न हो। इस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय सचिव मौलाना मोहम्मद शफी मदनी, मोहम्मद अहमद, इनामुर्रहमान, मौलाना जमीरुल हसन फलाही, मौलाना अब्दुस्सलाम बस्तवी और वरिष्ठ पत्रकार सैयद खलीक अहमद शामिल थे।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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