जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफ़र होगा आसान: रामसू वायाडक्ट और 3.5 किमी लंबी सुरंग बनकर तैयार
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है। रामबन जिले में 810 मीटर लंबे रामसू वायाडक्ट और डिगडोल को पंथयाल से जोड़ने वाली 3.5 किल
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है। रामबन जिले में 810 मीटर लंबे रामसू वायाडक्ट और डिगडोल को पंथयाल से जोड़ने वाली 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के पूरा होने पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है।
उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में हाईवे और सड़क संपर्क व्यवस्था में तेज़ी से सुधार हो रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि को क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
भूस्खलन वाले क्षेत्रों से मिलेगी मुक्ति
यह नई सुरंग और वायाडक्ट यात्रियों को पंथयाल और 'खूनी नाला' जैसे भूस्खलन-संभावित और खतरनाक हिस्सों से बचाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, मालवाहक वाहनों और सुरक्षा बलों के लिए एक सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित होगी। उपराज्यपाल के अनुसार, यह इंफ्रास्ट्रक्चर विशेष रूप से श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 के श्रद्धालुओं के लिए अहम है, क्योंकि इससे उन्हें सुरक्षित और निर्बाध यात्रा का अनुभव मिलेगा।
परियोजना की लागत और अन्य विवरण
डिगडोल से पंथयाल को जोड़ने वाली 3.5 किलोमीटर लंबी एटी-03 सुरंग का निर्माण सरला प्रोजेक्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने लगभग 846 करोड़ रुपये की लागत से किया है। यह जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के सबसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। अधिकारियों का मानना है कि इससे यात्रा का समय घटेगा, सुरक्षा बढ़ेगी और ट्रैफिक सुचारू रूप से चलेगा। इन प्रमुख सड़क परियोजनाओं को 3 जुलाई 2026 से यातायात के लिए खोलने की योजना है।
इनपुट: IANS



