शनिवार, 5 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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GSLV की 19वीं उड़ान सफल: ISRO ने सबसे भारी सैटेलाइट EOS-05 को कक्षा में स्थापित किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक और अहम कामयाबी हासिल करते हुए अपने जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) से अब तक के सबसे भारी सैटेलाइट को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया…

GSLV की 19वीं उड़ान सफल: ISRO ने सबसे भारी सैटेलाइट EOS-05 को कक्षा में स्थापित किया
(फोटो: IANS)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक और अहम कामयाबी हासिल करते हुए अपने जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) से अब तक के सबसे भारी सैटेलाइट को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, GSLV-F17 रॉकेट ने 2,367 किलोग्राम वजनी अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-05) को लेकर उड़ान भरी और मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।

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इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर मिशन के सफल होने की जानकारी दी। यह श्रीहरिकोटा से भारत का 107वां लॉन्च था और GSLV रॉकेट की 19वीं उड़ान थी। इस सफल प्रक्षेपण के बाद, इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने कहा, "मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि GSLV-F17 व्हीकल ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-05 (जियो इमेजिंग सैटेलाइट) को सफलतापूर्वक और सटीक रूप से उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है।"

लगातार बेहतर होती GSLV की क्षमता

इसरो प्रमुख ने GSLV की लगातार बढ़ती क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, "जैसा कि आप जानते हैं, जीएसएलवी का पहला प्रक्षेपण जीएसएलवी-डी1 था, जिसमें 1,536 किलोग्राम का पेलोड ले जाया गया था। तब से हमने इसके स्ट्रक्चरल मास को ऑप्टिमाइज़ करके और प्रोपल्शन सिस्टम में सुधार करके इस व्हीकल की परफॉर्मेंस को धीरे-धीरे बेहतर बनाया है। आज, हमने इसी लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल करके 2,367 किलोग्राम वज़न वाले सबसे भारी सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित किया है।"

EOS-05 सैटेलाइट की खासियत और उपयोग

EOS-05 को एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन स्पेसक्राफ्ट बताया गया है, जो जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। डॉ. नारायणन के अनुसार, यह सैटेलाइट लगातार भारत की निगरानी करेगा। उन्होंने कहा, "'जासूसी' शब्द का इस्तेमाल करना बहुत नकारात्मक है। यह सैटेलाइट काम का होगा और इससे मिलने वाला डेटा हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगा।" केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह विज़िबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में एडवांस्ड इमेजिंग की सुविधा देता है।

गगनयान मिशन पर भी अहम जानकारी

इसरो प्रमुख ने भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन 'गगनयान' पर भी अपडेट दिया। उन्होंने बताया कि यह एक टेक्नोलॉजी-प्रधान मिशन है और अब तक लगभग 8,000 टेस्ट पूरे हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "दूसरे सैटेलाइट मिशन के उलट, इसमें इंसान शामिल हैं, इसलिए इंसानों की सुरक्षा बहुत ज़रूरी है। हमने क्रू वाले मिशन से पहले तीन बिना क्रू वाले मिशन की योजना बनाई है। पहला बिना क्रू वाला मिशन इस साल लॉन्च के लिए तैयार हो रहा है।"

इनपुट: IANS

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