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पश्चिम बंगाल

दुर्गा पूजा को अंतरराष्ट्रीय मंच देने की तैयारी में बंगाल, ड्रोन शो से लेकर ग्लोबल कनेक्ट तक की योजना

पश्चिम बंगाल सरकार इस साल दुर्गा पूजा को एक वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में पेश करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को होने वाली एक अहम बैठक में इन…

दुर्गा पूजा को अंतरराष्ट्रीय मंच देने की तैयारी में बंगाल, ड्रोन शो से लेकर ग्लोबल कनेक्ट तक की योजना
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल सरकार इस साल दुर्गा पूजा को एक वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में पेश करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को होने वाली एक अहम बैठक में इन तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसका लक्ष्य दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करना और राज्य को एक प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

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राज्य सरकार की योजना यूनेस्को द्वारा कोलकाता की दुर्गा पूजा को 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' का दर्जा दिए जाने के बाद इसे बड़े पैमाने पर भुनाने की है। इस योजना के केंद्र में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, ड्रोन शो और संगीत समारोह शामिल हैं, ताकि बंगाल की समृद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रदर्शित किया जा सके।

भव्य आयोजन और वैश्विक जुड़ाव

इस पूरी पहल का एक खास हिस्सा 'दुनियाभर के बंगालियों की भावनाएं - दुर्गा पूजा ग्लोबल कनेक्ट 2026' नामक कार्यक्रम है। इसके तहत पर्यटन विभाग दुनिया भर में बसे बंगालियों को कोलकाता के मुख्य समारोहों से जोड़ने का काम करेगा। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, इन समारोहों की श्रृंखला 10 अक्टूबर को महालया के दिन ईडन गार्डन्स में एक विशाल सांस्कृतिक कार्यक्रम से शुरू होगी। इसमें पारंपरिक 'महिषासुरमर्दिनी' प्रस्तुति के अलावा लोक और शास्त्रीय प्रदर्शन भी शामिल होंगे।

इस योजना को अमल में लाने के लिए सरकार ने एक अनुभवी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की तलाश शुरू कर दी है और इसके लिए 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' भी जारी कर दिया है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

आयोजन में कई अनूठे कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। महालया की शाम को प्रसिद्ध कलाकारों का एक मेगा कॉन्सर्ट आयोजित करने की योजना है। साथ ही, पारंपरिक ढोल 'ढाक' के साथ एक विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास भी किया जा सकता है। अष्टमी के दिन पारंपरिक 'धुनाची' नृत्य का भी बड़ा आयोजन होगा।

इसके अलावा, एक बड़े स्टेडियम या ऑडिटोरियम में चार घंटे के 'भव्य दुर्गा पूजा कॉन्सर्ट' का भी प्रस्ताव है, जिसमें ढाक और धुनाची के साथ-साथ छऊ, बाउल, कीर्तन, रवींद्र संगीत और नेपाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी। इस वैश्विक प्रदर्शन के तहत बंगाली हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और कोलकाता के थीम-आधारित पंडालों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

सजावट और पर्यावरण संबंधी दिशा-निर्देश

समारोह के दौरान राज्य भर की प्रमुख सरकारी इमारतों और ऐतिहासिक महत्व की जगहों को विशेष वास्तुशिल्पीय प्रकाश (architectural lighting) से रोशन करने का प्रस्ताव है। हालांकि, दिशानिर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बिना विशेष अनुमति के स्टेज नहीं बनाए जा सकेंगे।

सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि भव्यता के बावजूद दुर्गा पूजा की धार्मिक पवित्रता और पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाजों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आयोजनों को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाएगा, जिसमें सिंगल-यूज प्लास्टिक पर रोक, कचरा प्रबंधन और डिजिटल निमंत्रण जैसे उपाय शामिल होंगे। सरकार की मंशा इस पहल को भविष्य में एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय उत्सव में बदलने की है।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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