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Israel-Palestine Conflict: क्या इजरायल और फिलिस्तीन को लेकर भारत की विदेश नीति में हो रहा है बदलाव?

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Israel-Palestine Conflict: क्या इजरायल और फिलिस्तीन को लेकर भारत की विदेश नीति में हो रहा है बदलाव?


Israel-Palestine Conflict: क्या इजरायल और फिलिस्तीन को लेकर भारत की विदेश नीति में हो रहा है बदलाव?

हाइलाइट्स:

  • क्या इजरायल-फिलिस्तीन को लेकर भारत की विदेश नीति में हो रहा बदलाव?
  • भारत के UNGA में दिए गए बयान के बाद उठ रहे सवाल
  • भारत का ताजा बयान इजरायल के प्रति विदेश नीति की झुकाव दिखा रहा है

इंद्राणी बागची, नई दिल्ली
क्या मिडिल ईस्ट के देशों को लेकर भारत अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है। क्या इजरायल-फिलिस्तीन को लेकर भारत सरकार अपनी पॉलिसी शिफ्ट कर रही है? अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत सरकार के हालिया कदमों ने इन सवालों को जन्म दिया है। 16 मई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इजरायल-फिलिस्तीन विवाद को लेकर भारत के बयान से लेकर 20 मई को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दिए गए भारत के बयान से कुछ ऐसा ही जाहिर हो रहा है। भारत के हालिया बयान से उसका इजरायल के पक्ष में झुकाव नजर आ रहा है।

शायद ऐसा पहली बार हुआ है जब इजरायल-फिलिस्तीन संकट को लेकर भारत ने अपने बयान से इस महत्वपूर्ण लाइन को हटाया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, ‘भारत वाजिब फिलिस्तीन के मुद्दे का मजबूती के साथ समर्थन करता है और इसके दो राष्ट्र के रूप में समाधान के लेकर प्रतिबिद्ध है।’ हालांकि यह लाइन संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्टेटमेंट से गायब रही।

इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने हमास के इजरायल पर रॉकेट हमलों की भी तीखी आलोचना की। इस बयान में कहा गया, ‘हम गाजा से इजरायल की ओर लगातार रॉकेट फयारिंग की निंदा करते हैं, इस वजह से कई आम नागरिकों की मौत हुई है। इसकी प्रतिक्रिया में गाजा पर हुए हुए हमलों से भी काफी मौतें और भारी तबाही हुई है। हम हालिया हिंसा के चक्र में आम एक भारतीय समेत अन्य आम नागरिकों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं।’

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भारत ने हालिया हिंसा में हमास के ऐक्शन की निंदा की जबकि इजरायल के ऐक्शन को आत्मरक्षा में की गई ‘प्रतिक्रिया’ बताया। 16 मई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने हमास के रॉकेट हमलों की निंदा की और इजरायली कार्रवाई को ‘प्रतिक्रियात्मक’ बताया। किसी बयान में भारत ने हमास और इजरायल के ऐक्शन क तुलना नहीं की। हालांकि UNGA में भारत ने कहा, ‘इजरायल और फिलिस्तीन के बीच सीधी बातचीत फिर से शुरू करने के लिए हर प्रयास किया जाना चाहिए।’ भारत के इस बयान का अगर हमास पर ऐसा माहौल बनाने की जिम्मेदारी होगी।

इससे पहले सुरक्षा परिषद में भारत ने कहा था, ‘हम दोनों पक्षों से ज्यादा से ज्यादा संयम बरतने की अपील करते हैं और तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने और यरुशलम और आसपास की जगहों पर यथास्थिति में एकतरफा बदलाव से बचने की अपील करते हैं।’ सुरक्षा परिषद में भारत के इस बयान से लग रहा था कि भारत ने दोनों पक्षों को लेकर संतुलित बयान दिया है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि पूर्वी यरुशलम और शेख जारा इलाकों में इजरायल के ऐक्शन से ही मुसीबतें बढ़ी हैं।

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भारत के इस कदम से बीजेपी समर्थक अपनी सरकार से ही नाराज दिखे और इजरायल का समर्थन नहीं करने के लिए केंद्र सरकार की निंदा की। उधर इजरायल ने इस पूरे मामले पर खुलकर कोई प्रतिक्रिया तो नहीं दी, लेकिन पीएम नेतन्याहू ने जब इस पूरे विवाद में साथ देने वाले देशों को ट्विटर पर शुक्रिया कहा तो उस लिस्ट से भारत का नाम गायब था। हालांकि बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के बयान से ये सारी चीजें हटा ली गईं, इससे भारत की विदेश नीति इजरायल के पक्ष में ज्यादा झुकती नजर आ रही है।

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