अमेरिका-ईरान तनाव: इजरायली विशेषज्ञ ने बताया, किस शर्त पर संभव है समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच इजरायल की एक पूर्व सांसद ने कहा है कि ईरान के साथ कोई भी कूटनीतिक समझौता तभी संभव है, जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण करने की अपनी सोच को बदल दे…
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच इजरायल की एक पूर्व सांसद ने कहा है कि ईरान के साथ कोई भी कूटनीतिक समझौता तभी संभव है, जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण करने की अपनी सोच को बदल दे। इजरायली संसद 'नेसेट' की पूर्व सदस्य डॉ. इनात विल्फ ने यह बात समाचार एजेंसी IANS के साथ एक विशेष बातचीत में कही। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ईरान के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को हमले जारी रखने पर 'आक्रामक और विनाशकारी' जवाब देने की चेतावनी दी है।
समझौते की राह में क्या हैं रुकावटें?
डॉ. इनात विल्फ, जो ओज पार्टी की अध्यक्ष भी हैं, का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरानी सरकार कितना झुकने को तैयार है। उनके अनुसार, ईरानी नेतृत्व अपने अस्तित्व को होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण से जोड़कर देखता है, जबकि अमेरिका के लिए यह एक 'रेड लाइन' है। उन्होंने कहा, "जब तक सरकार अपने बचाव को स्ट्रेट को कंट्रोल करने के विचार से अलग नहीं करती, मुझे नहीं लगता कि कोई डिप्लोमैटिक समझौता हो सकता है।"
डॉ. विल्फ ने बताया कि ईरान के पास आय के सीमित स्रोत हैं और वह पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, साथ ही उसे अपने ही लोगों का भी डर है। उनके मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नेतृत्व वाली सरकार अपने बचाव के लिए इस जलमार्ग पर नियंत्रण को ज़रूरी मानती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति की रणनीति पर राय
अमेरिकी हमलों पर बात करते हुए डॉ. विल्फ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की अगली चाल का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। उन्होंने कहा, "जब वह कहते हैं कि सभी विकल्प मौजूद हैं, तो उनका असल में यही मतलब होता है। उनके लिए, सेना और कूटनीतिक विकल्प एक ही कंटिन्यूटी का हिस्सा हैं।" उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप एक दिन सैन्य बल का इस्तेमाल कर सकते हैं और अगले ही दिन यह तय कर सकते हैं कि कूटनीति ही बेहतर रास्ता है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम की स्थिति
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी नीति के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर पूर्व सांसद ने कहा कि इस बारे में पूरी और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति के बारे में हमारे पास पूरी जानकारी नहीं है। इस बात को लेकर काफी अस्पष्टता है... यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के पास अब भी परमाणु सामग्री मौजूद है या नहीं, और उसका परमाणु कार्यक्रम वास्तव में कितना पीछे चला गया है।"
इनपुट: IANS



