शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ईरान का दावा: क़तर में सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे निशाना, कोई नागरिक क्षेत्र नहीं

ईरान ने क़तर की ज़मीन पर अपनी सैन्य कार्रवाइयों का बचाव करते हुए कहा है कि उसके हमले सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर केंद्रित थे और इसमें किसी भी नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया गया। समाचार एजेंसी…

ईरान का दावा: क़तर में सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे निशाना, कोई नागरिक क्षेत्र नहीं
(फोटो: IANS)

ईरान ने क़तर की ज़मीन पर अपनी सैन्य कार्रवाइयों का बचाव करते हुए कहा है कि उसके हमले सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर केंद्रित थे और इसमें किसी भी नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया गया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने यह बात एक दस्तावेज़ के हवाले से कही है, जिसे क़तर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) को सौंपा है।

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बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि क़तर सरकार द्वारा ITU को दिए गए आधिकारिक दस्तावेज़ में इस बात की पुष्टि की गई है कि ईरान के जवाबी हमले अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ थे।

क़तर का आरोप और ईरान का स्पष्टीकरण

प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के मुताबिक, क़तर की ओर से एकमात्र आरोप 18 मार्च को एक गैस फैसिलिटी पर हुए हमले को लेकर लगाया गया था। इस पर ईरान का कहना है कि उस दिन जिन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में किया जा रहा था।

ईरानी प्रवक्ता ने अपने बयान में अमेरिका पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अमेरिका के रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग है, जिस पर स्कूलों, अस्पतालों, रिहायशी इलाकों और शादी समारोहों जैसे नागरिक ठिकानों पर जानबूझकर हमले करने के आरोप लगते रहे हैं। बाघेई ने कहा, "एक सभ्य देश, जिसने कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक सिद्धांतों का पालन करना सीखा हो, और उन शासकों में जो शक्ति प्रदर्शन के लिए किसी नियम का पालन नहीं करते, बहुत बड़ा अंतर होता है।"

संयुक्त राष्ट्र की बातचीत की अपील

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका और ईरान से बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया है। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव दोनों देशों से कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने का आग्रह करते हैं। उन्होंने युद्ध के छह महीने पूरे होने को एक 'दुखद पड़ाव' बताते हुए कहा, "हम फिर से जोर देते हैं कि इसका एकमात्र समाधान कूटनीतिक समाधान है।"

इनपुट: IANS

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