नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग, 12 साल में क्षमता 275% बढ़ी
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, देश की गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil Fuel) से स्थापित ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट के आँकड़े को पार कर चुकी…
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, देश की गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil Fuel) से स्थापित ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट के आँकड़े को पार कर चुकी है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि यह क्षमता अब लगभग 302-303 गीगावाट तक पहुँच गई है। यह उपलब्धि भारत के नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाती है।
पिछले 12 वर्षों का सफ़र देखें तो यह वृद्धि असाधारण रही है। इस दौरान देश की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 80.3 गीगावाट से बढ़कर 300.5 गीगावाट हो गई, जो 275 प्रतिशत की ज़बरदस्त बढ़ोतरी है। इसी अवधि में, सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 58 गुना की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2.8 गीगावाट से बढ़कर 165 गीगावाट हो गई। वहीं, पवन ऊर्जा भी 21 गीगावाट से 176 प्रतिशत बढ़कर 58 गीगावाट तक पहुँच गई है।
निवेश और भविष्य की राह
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने यह जानकारी मुंबई में एक रोडशो के दौरान निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने बताया कि 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले पाँच वर्षों में 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की ज़रूरत होगी।
जोशी ने कहा, "इस पूंजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय वित्तीय संस्थानों, पूंजी बाजारों, बीमा निधियों, अवसंरचना निवेशकों और निजी पूंजी के माध्यम से जुटाना होगा, और इसी कारण मुंबई भारत के स्वच्छ ऊर्जा निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन जाता है।" उन्होंने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में ही भारत ने 17 गीगावाट से ज़्यादा नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जिसमें 14.33 गीगावाट सौर और 2 गीगावाट से अधिक पवन ऊर्जा शामिल है।
‘प्रधानमंत्री सूर्य घर’ योजना और वैश्विक मंच
इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने 'प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' की सफलता का भी जिक्र किया, जिससे अब तक लगभग 53.5 लाख लाभार्थी परिवारों को फायदा मिल चुका है। उन्होंने आगामी 'भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो (BRESSE) 2026' में हिस्सा लेने के लिए सभी हितधारकों से आग्रह किया। जोशी के अनुसार, इस चार दिवसीय आयोजन में 75 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और ऊर्जा मंत्रियों के साथ 25,000 से ज़्यादा प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है, जो वैश्विक निवेशकों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ जुड़ने का एक बड़ा अवसर होगा।
इनपुट: IANS



