मंगलवार, 4 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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राजीव गांधी ने किस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के बदले गणतंत्र दिवस का प्रयोग अपने भाषण में किया

15 अगस्त,1947 को हमारा देश आजाद हुआ. उसके बाद से प्रत्येक वर्ष भारत के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर तिरंगा फहराने और देश को संबोधित करने का रिवाज चला आ रहा…

राजीव गांधी ने किस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के बदले गणतंत्र दिवस का प्रयोग अपने भाषण में किया

15 अगस्त,1947 को हमारा देश आजाद हुआ. उसके बाद से प्रत्येक वर्ष भारत के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर तिरंगा फहराने और देश को संबोधित करने का रिवाज चला आ रहा है. जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा देश लोगों के लिए शुरू की गई योजना की जानकारी दी जाती है या भविष्य की योजना के बारे में भी भाषण में चर्चा की जाती है. 1987 से पहले जो भी प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देते थे, उनके पास लिखित में मुख्य बिंदू होते थे ताकि वो किसी चर्चा के बिंदू को भूल ना जाएं.

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राजीव गांधी

लेकिन 1987 के बाद से पूरा भाषण लिखित में होता था. जिसको भारत के प्रधानमंत्री पढकर भाषण देते थे. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी जी जो की बहुत जबरदस्त वक्ताओं में शामिल थे. इस रिवाज का पालन किया. 2014 में जब नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इस रिवाज को तोड़ा. लिखित भाषण के 1987 से शुरू होने के पीछे एक रोचक फैक्ट है.

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राजीव गांधी

दरअसल हुआ ये कि जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी 1986 में स्वतंत्रता दिवस पर अपना भाषण दे रहे थे, तो उन्होंने गलती से स्वतंत्रता दिवस की जगह गणतंत्र दिवस शब्द का प्रयोग किया. जिसके बाद से पूरा भाषण पहले ही लिखित में तैयार किया जाता था तथा उसे पढ़कर प्रधानमंत्री भाषण देते थे.

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पूर्व प्रधानमंत्री के इस भाषण के बाद भाषण के इस हिस्से को कट कर दिया गया. जिसके बाद पूरे भाषण के लिखित में होने और उसे पढ़ने की परिपाटी शुरू हुई. जो 2013 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए भाषण के समय तक चलती रही. 2014 से भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रिवाज को तोडते हुए अपना भाषण दिया.

KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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