शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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इमरान खान को निजी अस्पताल नहीं ले जाया गया, बहन ने लगाया अदालत के आदेश की अवमानना का आरोप

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर उनकी बहन उज्मा खान ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद इमरान को उनकी पसंद के निजी अस्पताल में…

इमरान खान को निजी अस्पताल नहीं ले जाया गया, बहन ने लगाया अदालत के आदेश की अवमानना का आरोप
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर उनकी बहन उज्मा खान ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद इमरान को उनकी पसंद के निजी अस्पताल में इलाज के लिए नहीं ले जाया गया, जो कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का खुला उल्लंघन है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उज्मा खान ने इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह भी कहा कि अदियाला जेल में इमरान खान को मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है।

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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि इमरान खान को जांच के लिए शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया जाए। इसके बाद गुरुवार रात अस्पताल के बाहर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया था। हालांकि, शुक्रवार को सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया कि इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल के बजाय सरकार द्वारा संचालित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स) ले जाया गया।

जांच के दौरान क्या हुआ?

उज्मा खान, जो खुद एक डॉक्टर हैं, जांच के समय अपने भाई के साथ मौजूद थीं। उन्होंने अपने निजी डॉक्टर, डॉ. फैसल सुल्तान के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उन्हें गुरुवार को अदियाला जेल पहुंचने के लिए फोन आया था। वहां से उन्हें कार में पिम्स ले जाया गया, न कि उस अस्पताल में जहां अदालत ने ले जाने को कहा था। उन्होंने पिम्स के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, “चारों ओर अंधेरा था,” और उन्हें एक ऑफिस में ले जाया गया जहाँ एक व्यक्ति ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च से रास्ता दिखाया।

उज्मा के अनुसार, इमरान खान उन्हें देखकर हैरान हो गए और बार-बार यही कहते रहे कि उनके साथ "क्रूरता" की गई है। उनकी सेहत के बारे में एक सवाल पर उज्मा ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर सामान्य है और नजर में भी सुधार हुआ है, बस थोड़ी सी ब्लीडिंग (हैमरेज) बाकी है।

फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने भी सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के फैसले को कूड़ेदान में फेंक दिया गया," और यह अदालत की अवमानना है। उन्होंने आगे कहा, "अब पाकिस्तान भर के जजों को यह तय करना होगा कि वे अपने फैसलों को लागू करवाएं या अदालतें बंद कर दें।"

इनपुट: IANS

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