क्यों है हिन्दू समाज में दिवाली का महत्व, जाने गणेश – लक्ष्मी के पूजन की विधि

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DIWALI PUJAN
जानिए दिवाली से जुड़ी कुछ खास बातें

दिवाली नाम सुनते ही फुलझरी, मिठाई, उपहार और गणेश लक्ष्मी की पूजा जेहन में आता है , जानते है दिवाली के बारे में कुछ दिलजसप और रोचक बातें , लक्ष्मी – गणेश पूजन के बारे में तो बहुत सुना होगा , जानते है की दिवाली अलग राज्यों में कैसे मानते है , अगर मारवाड़ी समाज के बारे में बात की जाए तो दिवाली पर लक्ष्मी – गणेश और बहीखाते की पूजा की जाती है , वही सिख समाज दिवाली के बंदी छोड़ दिवस की रूप में मनाया जाता है ऐसे ही अलग समाज में दिवाली अलग रूप से मानते है।

दिवाली से जोड़ा इतिहास :

हिन्दू समाज में दिवाली त्योहार का बहुत मह्त्वपूर्ण स्थान है। दिवाली भारत के अलावा सिंगापुर,इंडोनेशिया, मॉरीशस जैसे देशो में भी बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। दिवाली मानाने की पीछे एक इतिहास है , दिवाली का त्योहार भगवन राम के 14 साल वनवास के पश्चात अयोध्या लौटने पर पर सभी आयोदयवासी ने राम भगवन सीता और लक्ष्मण का स्वागत दिया जलाकर किया , बहुत से कथा दिवाली के साथ जुड़ी हुई है। , प्राचीन हिन्दू महाकाव्य महाभारत अनुसार कुछ दीपावली को 12 वर्षों के वनवास व 1 वर्ष के अज्ञातवास के बाद पांडवों की वापसी के प्रतीक रूप में मानते हैं।

कई हिंदु दीपावली को भगवान विष्णु की पत्नी तथा उत्सव, धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी से जुड़ा हुआ मानते हैं। दीपावली का पांच दिवसीय महोत्सव देवताओं और राक्षसों द्वारा दूध के लौकिक सागर के मंथन से पैदा हुई लक्ष्मी के जन्म दिवस से शुरू होता है। दीपावली की रात वह दिन है जब लक्ष्मी ने अपने पति के रूप में विष्णु को चुना और फिर उनसे शादी की लक्ष्मी के साथ-साथ भक्त बाधाओं को दूर करने के प्रतीक गणेश; संगीत, साहित्य की प्रतीक सरस्वती; और धन प्रबंधक कुबेर को प्रसाद अर्पित करते हैं. कुछ दीपावली को विष्णु की वैकुण्ठ में वापसी के दिन के रूप में मनाते है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं और जो लोग उस दिन उनकी पूजा करते है वे आगे के वर्ष के दौरान मानसिक, शारीरिक दुखों से दूर सुखी रहते हैं।

दिवाली तिथि व शुभ मुहूर्त की बात करे तो :
दिवाली का त्यौहार 27 अक्टूबर रविवार के दिन मनाया जायेगा।
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 27 अक्टूबर रविवार शाम 6 बजकर 42 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक।
पूजा की कुल अवधि 1 घंटा 30 मिनट की होगी।
प्रदोष काल पूजा का समय होगा शाम 5 बजकर 36 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक।
अमावस्या तिथि शुरू होगी 27 अक्टूबर रविवार दोपहर 12:23 मिनट पर।
वही अमावस्या तिथि समाप्त होगी 28 अक्टूबर सोमवार सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर।

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दिवाली पूजन से जोड़े विधि – विधान :

दिवाली पूजा व लक्ष्मी पूजन विधि का खास ध्यान रखा जाता है , दिवाली के दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते है सांध्यकाल के समय चौकी पर लक्ष्मी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर माँ लक्ष्मी के समीप चावलों पर जल से भरे कलश की स्थापना भी कर ले और घी के दीपक जलाये इसके बाद हाथ में जल व पुष्प लेकर सभी देवी देवताओं का आहवाहन करे और विधिवत पूजा करे पूजा के बाद घर के कोनों में भी दिए जलाकर रख दे. भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा के बाद धन के देवता कुबेर जी की पूजा भी अवश्य करें।

दिवाली पूजन का महत्व :

हिंदू धर्म में प्रत्येक त्योहार धार्मिक महत्व के साथ ही ज्योतिष महत्व भी रखता है माना जाता है कि त्यौहारों पर ग्रहों की दिशा और विशेष योग मनुष्य जीवन के लिए शुभ होते हैं। दीवाली के त्यौहार में धनतेरस के दिन किसी वस्तु की खरीददारी करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके पीछे का ज्योतिष महत्व कहता है की इस समय सूर्य और चंद्रमा तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में होते हैं जो की ग्रहो की बहुत ही उत्तम फल देने वाली स्थति होती है वही दीपावली आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से भी बहुत अधिक महत्व रखती है ये अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार कहा जाता है।