गुरूवार, 16 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
स्वास्थ्य

ड्रोन से TB जांच: मरीज़ों का खर्च ₹9,451 से घटकर ₹91 हुआ, जांच भी 10 दिन पहले

भारत में टीबी (क्षय रोग) की जांच को लेकर एक क्रांतिकारी बदलाव सामने आया है, जिसमें ड्रोन तकनीक की मदद से मरीज़ों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ 99% से भी ज़्यादा कम हो गया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान प

ड्रोन से TB जांच: मरीज़ों का खर्च ₹9,451 से घटकर ₹91 हुआ, जांच भी 10 दिन पहले
(फोटो: IANS)

भारत में टीबी (क्षय रोग) की जांच को लेकर एक क्रांतिकारी बदलाव सामने आया है, जिसमें ड्रोन तकनीक की मदद से मरीज़ों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ 99% से भी ज़्यादा कम हो गया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की 'आई-ड्रोन' पहल के तहत किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जहां पहले मरीज़ों को जांच प्रक्रिया पर औसतन 9,451 रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़ते थे, वहीं अब यह खर्च घटकर महज़ 91 रुपये रह गया है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह महत्वपूर्ण अध्ययन तेलंगाना के यादद्री-भुवनगिरी ज़िले में किया गया। इसमें ड्रोन के ज़रिए मरीज़ों के बलगम के नमूनों को दूर-दराज के स्वास्थ्य केंद्रों से जांच प्रयोगशाला तक पहुंचाया गया। इस नई व्यवस्था ने न केवल खर्च घटाया, बल्कि जांच पूरी होने में लगने वाले समय को भी 15 दिन से घटाकर औसतन सिर्फ़ पांच दिन कर दिया, जिससे इलाज समय पर शुरू करने में मदद मिली।

जांच आसान, खर्च और समय की भारी बचत

इस अध्ययन में एम्स बीबीनगर और राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम ने सहयोग किया। अध्ययन के लिए कुल 840 लोगों को शामिल किया गया और ड्रोन-आधारित नई व्यवस्था की तुलना पारंपरिक प्रणाली से की गई। पुरानी व्यवस्था में मरीज़ों को जांच के लिए लंबी दूरी तय कर खुद प्रयोगशाला तक जाना पड़ता था, जिसमें यात्रा और मज़दूरी के नुकसान जैसे कई खर्च शामिल थे। ड्रोन व्यवस्था के तहत मरीज़ अपने नज़दीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या उप-स्वास्थ्य केंद्र पर ही नमूना दे सकते थे, जिसे ड्रोन से लैब भेजा गया। इसके चलते कई मरीज़ों का यात्रा खर्च शून्य हो गया।

कैसे काम करता है यह मॉडल?

इस पहल को 'केंद्र और संपर्क केंद्र' (Hub and Spoke) मॉडल पर लागू किया गया। इसके तहत 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 60 उप-स्वास्थ्य केंद्रों और चार टीबी इकाइयों को एक साथ जोड़ा गया। इस नेटवर्क ने स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों के करीब पहुंचा दिया, जिससे दूर स्थित जांच केंद्रों पर जाने की उनकी निर्भरता खत्म हो गई। स्वास्थ्यकर्मियों ने भी माना कि इस प्रणाली से काम की क्षमता बढ़ी है और जांच में होने वाली देरी कम हुई है।

भविष्य की राह और चुनौतियां

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, “समय पर और किफायती जांच की सुविधा भारत से टीबी समाप्त करने के प्रयासों का अहम हिस्सा है। यह अध्ययन दिखाता है कि आधुनिक तकनीक की मदद से भौगोलिक कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि आई-ड्रोन के अनुभव भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मज़बूत करेंगे।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन सिर्फ एक ज़िले के अनुभव पर आधारित है। इसे बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले मौसम, ड्रोन की भार उठाने की क्षमता और कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देने जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना ज़रूरी होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social हेल्थ डेस्क

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